क्यों की जाती हैं हिन्दू धर्म में मूर्ति-पूजा, क्या है इसका महत्व…!!!

क्यों की जाती हैं हिन्दू धर्म में मूर्ति-पूजा, क्या है इसका महत्व…!!!

मूर्ति के रूप में ईश्वर के दर्शन होते हैं
मूर्ति के रूप में ईश्वर के दर्शन होते हैं

बचपन से ही हमें मंदिर जाना सिखाया जाता है। वहां जाना एवं पूजा-आरती करने की सीख हमेशा से हमें दी जाती है। जब हम मंदिर की सीढ़ियों को पार करते हैं तो हमें मूर्ति नहीं मूर्ति के रूप में ईश्वर के दर्शन होते हैं। हिन्दू धर्म में मान्यता है कि ईश्वर सर्वव्यापी है यानि हर जगह मौजूद है। यदि भगवान हर चीज़ में है तो मूर्ति में भी होगा, बस श्रद्धा-भाव से देखने की ज़रूरत है। आज हम मूर्ति पूजा के बारे में जानेंगे।

सबसे पहले हम जानेंगें मूर्ति क्या है ?एक देवता की छवि जिसका उद्देश्य पूजा है उसी को ही हिन्दू धर्म में मूर्ति कहते हैं।हिंदू धर्म में मूर्तियों को प्रतिमा, विग्रह भी कहा जाता है।

1.) प्रतिमा– यह एक संस्कृत शब्द है जिसका मतलब है किसी देवता की छवि या समानता।

2.) मूर्ति– यह एक संस्कृत शब्द है जिसका मतलब है किसी भी प्रतिबिम्ब को साकार रूप में अभिव्यक्ति ।

3.) विग्रह– यह एक संस्कृत शब्द है जिसका तात्पर्य है आकार यह एक देवता की पवित्र छवि या चित्रण करने के लिए संदर्भित होता है, की हिंदू धर्म में मूर्तियों के स्थिर प्रतीकों का एक हिस्सा हैं ।

दरअसल मूर्ति बनाना और उसके समक्ष रहकर ध्यान करना एक विज्ञान है। वैज्ञानिक आधार पर एक विशिष्ट मूर्ति का निर्माण कर उसमें ऊर्जा भरी जाती है।मूर्ति कला एक ऐसा विज्ञान है, जिसके द्वारा उन मूर्तियों में सकारात्मक ऊर्जाओं को इस तरह पिरोया जाता है कि जिस घर में वो रहती हैं उस

घर के लोगों के जीवन को बेहतर करती हैं।

मूर्ति-पूजा के पीछे का विज्ञान यही कहता है कि मूर्ति पूजा से सकारात्मक ऊर्जा-शक्ति हमारे शरीर और मस्तिष्क को स्वच्छ कर हमें सही दिशा दिखने की शक्ति देती है|

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