मृत्यू से ठीक पहले भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को स्त्रियों के बारे में बताईं थीं यह गुप्त बातें !!

मृत्यू से ठीक पहले भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को स्त्रियों के बारे में बताईं थीं यह गुप्त बातें !!

सनातन संस्कृति में मातृशक्ति को अत्यंत आदरणीय माना जाता है। आध्यात्मिक व सामाजिक ग्रंथों में ऋषि यों ने कहा है कि महिलाओं का सम्मान करना चाहिए जिस राष्ट्र में महिलाओं का सम्मान नहीं होता उसका पतन हो जाता है। महाभारत इसका ज्वलंत प्रमाण है जबद्रोपदी के चीरहरण का फल फोटो सहित अन्य योद्धाओं को अपने प्राण गवा कर चुकाना पड़ा पुरानी कथाओं और ऋषि द्वारा रचित संहिताओं में महिलाओं के अधिकार तथा कर्तव्यों का वर्णन किया गया है। महाभारत में जब पितामह भीष्म शरशय्या पर मृत्यु की प्रतीक्षा कररहे थे तब उन्होंने युधिष्ठिर को नीति संबंधी महत्वपूर्ण बातें बताई थी।

उन्होंने महिलाओं के सम्मान और अधिकार पर काफी जोर दिया आप भी जानिए में प्राचीन बातें जो आज भी महत्वपूर्ण और प्रासंगिक है।

1.महाभारत के इस वचन के अनुसार उसी घर में प्रसन्नता का वास होता है जहां स्त्री प्रसन्न हो जिस घर में स्त्री दुखी है उसका सम्मान नहीं होता वहां से लक्ष्मी और देवता भी चले जाते हैं। और ऐसे स्थान पर विवाद कटु वचन दुख हो रहा भावों की प्रबलता होती है।

2.जिस परिवार में बेटी स्त्री को दुख मिलता है वह परिवार भी दुख हो से बच नहीं सकता उसे दुख सुख की प्राप्ति होती हैv यह दुख सुख में परिवर्तित हो सकता है अतः परिवार में बेटी हो या बहू उसका सम्मान करना चाहिए जहां इन का सम्मान होता है वह देवगढ़ भी निवास करतेहैं।

3.मनुष्य को ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जो उसके लिए श्राप और शोक लेकर आए महाभारत में श्राप से संबंधित अनेक वचन गाते हैं। शास्त्रों के अनुसार स्त्री बालक बालिकाओं को असहाय प्यासा भूखा रोगी तपस्वी मरणासन्न व्यक्ति को नहीं सताना चाहिए जो इनसे श्रापलेता है उनका विनाश निश्चित रूप से होता है।

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