आज जानिये यह अध्भुध रहस्य मृत्यु के बाद आत्मा कब और कैसे गर्भ में प्रवेश करती है!!

आज जानिये मृत्यु के बाद आत्मा कब और कैसे गर्भ में प्रवेश करती है!!

जन्म और मरण के रहस्य के बारे में वैज्ञानिक हमेशा से यही दर्शाता आया है। लेकिन आज तक इस पर से कोई पर्दा नहीं उठ पाया यही वजह है कि इस मानव जीवन का सबसे बड़ा रहस्य कि आखिर मृत्यु के बाद क्या होता है। कब नया शरीर मिलता है आत्मा गर्भ में कब प्रवेश करती है? क्या गर्भ धारण करते वक्त कोई ऊर्जा प्रवेश करती है? लेकिन इसका जवाब हमारे सिद्ध योगियों और सन्यासियों के पास है। इस विषय पर चर्चा करेंगे मृत्यु के बाद आत्मा गर्भ में कब और कैसे प्रवेश करती है ।हम हमेशा से ही यही जानने में उत्सुकता रखते हैं कि क्या गर्भधारण के वक्त कोई उर्जा शरीर में प्रवेश करती है इसका जवाब है नहीं गर्भधारण के ठीक बाद कोई उर्जा गर्भ में प्रवेश नहीं करती है।

जब दो शरीर का मिलन होता है तो वह एक सृजन की शुरूआत करते हैं। इस बात को आप इस तरीके से समझे जब आप संभोग करते हैं तो एक अवसर पैदा करते हैं जिसमें आकाश में उड़ती आत्मा अपने योग्य शरीर को समझकर चुनाव करती है। और उसमें प्रविष्ट होती है आपने एक अवसर पैदा किया जो जन्म के लिए तैयार है । वह हमेशा से ही एक शरीर की तलाश में रहता है गर्भ में प्रविष्ट करने के पहले उसके पास विकल्प होते हैं। और यह शरीर चुनने की मात्रा कितनी होती है यह इस बात पर निर्भर करती है कि उसने अपना जीवन कितना सचेत हो कर दिया था एक आत्मा जिसमें अभी तक शरीर में प्रवेश नहीं किया है। उसमें एक खास गर्भ में खास शरीर में जाने की एक प्रवृत्ति होती है ठीक उसी प्रकार जैसे कि हर इंसान की पसंद अलग होती है अलग स्वभाव के लोग पसंद होते हैं।

कहते हैं कि जब एक स्त्री गर्भ धारण करती है तो 40 से 48 दिन तक यह सिर्फ एक शरीर रहता है। उसमें इस वक्त जीवन पता नहीं रहती है सिर्फ कोशिकाएं रहती है या फिर यह कह दीजिए कि गर्भ में उस वक्त कोशिकाओं का ढेर रहता है लेकिन थी गर्भधारण के 40 से 48 दिन बाद उसमें प्राण प्रविष्ट होते हैं। माना जाता है कि कोई इंसान की मृत्यु उस वक्त होती है जिस समय बहुत-बहुत प्राण ऊर्जा से भरा था उसे दूसरा शरीर जल्दी नहीं मिलता इसका मतलब जब उसकी मृत्यु हुई उस समय उसकी प्राण ऊर्जा भरपूर थी लेकिन किसी रोग है ।या दुर्घटनावश उसने अपना शरीर छोड़ दिया उसे दूसरा शरीर पाने के लिए शांत होने की जरूरत होती है और जब वह शांत होगी तब उसे नया शरीर मिलेगा इसके लिए हमारे भारतीय संस्कृति में कुछ कर्मकांड और प्रक्रियाएं है जिससे कि उसे ज्यादा भटकना ना करें और उसके साथ होने की प्रक्रिया ज्यादा तीव्र हो सके।

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