सनातन धर्म का अर्थ क्या होता है?? सनातन धर्म में सनातन क्या है ? ज़रूर पढ़े ..!!!

सनातन धर्म का अर्थ क्या होता है

इसके लिए  अथर्ववेद के इस मन्त्र को देखिये –

सनातनमेनमहुरुताद्या स्यात पुनण्रव् ( अधर्ववेद 10/8/23)

अर्थात – सनातन उसे कहते हैं जो , जो आज भी नवीकृत है ।

‘सनातन’ का अर्थ है – शाश्वत या ‘हमेशा बना रहने वाला’

सनातन धर्म में सनातन क्या है ?

सनातन अर्थात जो सदा से है, जो सदा रहेगा,  जिसका अंत नहीं है और जिसका कोई आरंभ नहीं है वही सनातन है।  और सत्य में केवल हमारा धर्म ही सनातन है,  यीशु से पहले ईसाई मत नहीं था, मुहम्मद से पहले इस्लाम मत नहीं था।  केवल सनातन धर्मं ही सदा से है, सृष्टि के आरंभ से ।

परमपिता परमात्मा ने ही सब मनुष्यों के कल्याण के लिए वेदों का प्रकाश, सृष्टि के आरंभ में किया।

जैसे जब हम नया मोबाइल लाते हैं तो साथ में एक गाइड मिलती है , कि इसे यहाँ पर रखें , इस प्रकार से वरतें , अमुक स्थान पर न ले जायें, अमुक चीज़ के साथ न रखें,  आदि …।

उसी प्रकार जब उस परमपिता ने हमें ये मानव तन दिए, तथा ये संपूर्ण सृष्टि हमे रच कर दी,

तब क्या उसने हमे यूं ही बिना किसी ज्ञान व बिना किसी निर्देशों के भटकने को छोड़ दिया ?

जी नहीं, उसने हमे साथ में एक गाइड दी, कि इस सृष्टि को कैसे वर्तें, क्या करें, ये तन से क्या करें, इसे कहाँ लेकर जायें, मन से क्या विचारें, नेत्रों से क्या देखें, कानो से क्या सुनें, हाथो से क्या करें आदि।  उसी का नाम वेद है।  वेद का अर्थ है ज्ञान ।