मंत्र का उच्चारण करें ठीक से,कहीं न हो जाए अर्थ का अनर्थ..!!!

हिन्दू धर्म में मंत्रोंच्चाआर का काफी महत्व है
हिन्दू धर्म में मंत्रोंच्चाआर का काफी महत्व है

हमारे हिन्दू धर्म में मंत्रोंच्चाआर का काफी महत्व बताया गया है। कहा जाता है मन्त्रों में इतनी शक्ति होती है की कोई भी कष्ट हो मंत्रोंच्चाआर की शक्ति से उसे टाला जा सकता है।

मंत्रों से बड़े-बड़े काम आसानी से हो जाते हैं। कोई काम रुका है, या कोई अड़चन सामने आ जाती है तो मंत्रों का जाप करना शुरु कर दें। सबकुछ सही हो जाएगा। मंत्र शक्‍ित का आधार हमारी आस्था से जुड़ा है। मंत्रों के जाप से आत्माध, देह, और समस्तर वातावरण शुद्ध होता है।परन्तु यदि मंत्रोंच्चाआर में

नियमों का पालन न किया गया, तो कभी-कभी बड़े घातक परिणाम सामने आते हैं। इसीलिए मंत्रों के उच्चा-रण में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। ध्यान रखें कि मंत्रोंच्चाआर में कोई गलती नहीं होनी चाहिए। एक छोटी सी गलती किए-कराए पर पानी फेर सकती है। उच्चारण में एक गलती अर्थ का अनर्थ कर देगी।

अब जानते है ध्यान रखने योग्य बातें

  • मंत्रों का उच्चारण सही होगा तो हमें इनका पूर्ण लाभ मिल जाएगा।
  • मंत्र जपने के लिए मन में दृढ़ विश्वागस होना चाहिए, तभी मंत्रों के प्रभाव से हम परिचित हो सकते हैं।
  • मंत्र जाप करने से पूर्व साधक को अपने मन एंव तन की स्वचच्छैता का पूर्ण ध्याून रखना चाहिए।
  • जाप करने वाले व्य क्‍ित को आसन पर ही बैठकर साधना करनी चाहिए। आसन का उपयोग इसलिए आवश्यैक माना जाता है क्योंउकि उस समय जो शक्‍ित हमारे भीतर संचालित होती है वह आसन ना होने से सीधे धरती में समाहित हो जाती है।

  • मंत्रों के उच्चारण से पूर्व, शरीर का संतुलन में होना तथा नाड़ियों का शुद्धीकरण आवश्यक है, तभी साधक मंत्र की शक्ति का संचालन कर सकेगा।

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