आज जानिए..!!महिलाएँ सुहाग की निशानी के लिए मांग में सिन्दूर क्यों लगाती है..??

आज जानिए..!!महिलाएँ सुहाग की निशानी के लिए मांग में सिन्दूर क्यों लगाती है..??

महिलाएँ सुहाग की निशानी के लिए मांग में सिन्दूर लगाती है
महिलाएँ सुहाग की निशानी के लिए मांग में सिन्दूर लगाती है

सिंदूर किसी भी सुहागन स्त्री के 16 श्रृंगार में से एक होता हैं।जिसका उसके जीवन में बहुत ही महत्व हैं।सिंदूर सुहागन के सुहाग का प्रतीक माना जाता हैं।इसलिए विवाहित स्त्री के लिए सिंदूर अमूल्य एवं परम आवश्यक होता हैं।महिला सिर के जिस स्थान पर सिंदूर लगाती हैं वह स्थान ब्रह्मरन्ध्र और अध्मि नामक कोमल स्थान के ठीक ऊपर होता है।माना जाता है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं का यह स्थान अधिक कोमल और संवेदनशील होता है। सिंदूर में मौजूद तत्व इस स्थान से शरीर में मौजूद वुद्युत उर्जा को नियंत्रित करती है। इससे बाहरी दुष्प्रभाव से भी बचाव होता है।लेकिन प्राचीन काल की तुलना में आज के आधुनिक युग में मांग में सिंदूर भरने का प्रचलन कम हो गया हैं।हिंदू पौराणिक कथाओं में सिंदूर का आध्यात्मिक महत्व माना जाता है, लेकिन क्या आपने कभी सिंदूर लगाने के पीछे के कारणों को जानने का प्रयास किया है। इस सिंदूर को ना केवल शादी के प्रतीक के रूप में लगाया जाता है बल्कि इसे लगाने के पीछे और भी कई कारण हैं जो आज हम आपको बताने जा रहे हैं।एक पौराणिक कथा के अनुसार जब हनुमान जी ने सीता माता को सिंदूर लगाते देखा तो पूछा लिया कि माता आप सिंदूर क्यों लगा रही हैं। इसके उत्तर में देवी सीता ने कहा कि मांग में सिंदूर लगाने से पति की आयु लंबी होती है।पति-पत्नी के बीच प्रेम बना रहता है। देवी सीता के इस कथन के बाद से ही महिलाओं में सिंदूर से मांग भरने की परंपरा ने जोर पकड़ा।हिंदू समाज में जब भी किसी लड़की की शादी होती हैं तो उसके लिए सिंदूर लगाना बहुत जरूरी होता है।

भारतीय पौराणिक कथाओं में लाल रंग के माध्यम से सती और पार्वती की ऊर्जा को व्यक्त किया गया है। सती को हिन्दू समाज में एक आदर्श पत्नी के रूप में माना जाता है। जो अपने पति के खातिर अपने जीवन का त्याग सकती है। हिंदुओं का मानना है कि सिंदूर लगाने से देवी पार्वती ‘अखंड सौभागयवती’ होने का आशीर्वाद देती हैं। वैज्ञानिकों का मानना हैं कि जब किसी लड़की का विवाह होता हैं तो उस पर विभिन्न प्रकार की जिम्मेदारियों का दबाव एक साथ आता हैं। जिनका प्रभाव सीधा उस लड़की के मस्तिष्क पर पड़ता हैं।इस तनाव के करण ही विवाह के कुछ समय बाद से ही महिला सिर में दर्द, अनिद्रा जैसे अन्य मस्तिष्क से जुड़े रोगों से ग्रस्त रहती हैं।सिंदूर में मिश्रित पारा धातु एक तरल पदार्थ हैं।जो की मस्तिष्क के लिए बहुत ही लाभदायक सिद्ध होता हैं।पारा इन सभी रोगों से महिलाओं को मुक्त रखने में बहुत ही सहायक होता हैं। इसलिए महिलाओं को विवाह होने के बाद अपनी मांग में सिंदूर अवश्य लगाना चाहिएयह कहा जाता है कि देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर पांच स्थानों पर रहती हैं और उन्हें हिन्दू समाज में सिर पर स्थान दिया गया है। जिसके कराण हम माथे पर कुमकुम लगा कर उन्हें समान देते हैं। देवी लक्ष्मी हमारे परिवार के लिए अच्छा भाग्य और धन लाने में मदद करती हैं।

ऐसा कहा जाता है की हिन्दू धर्म में नवरात्र और दीवाली जैसे महत्वपूर्ण त्योहारों के दौरान पति के द्वारा अपनी पत्नी की मांग में सिंदूर लगाना शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह उनके एक साथ रहने का प्रतीक होता है और इससे वो काफी लंबे समय तक एक साथ रहते हैं।

 

 

 

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