आज पढ़िए..!!उज्जैन के अति प्राचीन मंदिर के बारे में जहाँ माँ को चढ़ाई जाती है मदिरा…!!!!!

आज पढ़िए..!!उज्जैन के अति प्राचीन मंदिर के बारे में जहाँ माँ

को चढ़ाई जाती है मदिरा…!!!!!

माता महामाया व माता महालाया चौबीस खंबा माता के नाम से प्रसिद्ध है
माता महामाया व माता महालाया चौबीस खंबा माता के नाम से प्रसिद्ध है

महाकाल वन के मुख्य प्रवेश द्वार पर विराजित माता महामाया व माता महालाया चौबीस खंबा माता के नाम से प्रसिद्ध           है ,कभी यह महाकाल वन का मुख्य प्रवेश द्वार रहा है । प्रवेश द्वार में चौबीस खम्बे होने के कारण नाम चौबीसखंबा पड़ा । अवंतिका नगरी के प्राचीन द्वार पर विराजमान हैं दो देवियां जिन्हें नगर की सुरक्षा करने वाली देवियां कहा जाता है।तंत्र साधना के लिए प्रसिद्ध उज्जयिनी के चारों द्वार पर भैरव तथा देवी विराजित है , जो आपदा-विपदा से नगर की रक्षा करते है चौबीसखंबा माता उनमे से एक है । चौबीसखंबा माता मंदिर पुरात्तव विभाग के अधीन संरक्षित स्मारक है । यह मंदिर करीब १००० साल पुराना होकर परमारकालीन स्थापत्य कला तथा द्वार परंपरा का उत्कृष्ट उदारहण है ।  अब कालांतर में यह नगर के मध्य विराजित है। मंदिर के समीप पटनी बज़ार तथा सराफा बाजार जैसे प्रमुख बज़ार है। जिससे बड़े व छोटे कारोबारी जुड़े हुए है । यह है उज्जैन नगर में प्रवेश करने का प्राचीन द्वार। पहले इसके आसपास परकोटा या नगर दीवाल हुआ करती थी। अब वे सभी लुप्त हो गई हैं, सिर्फ प्रवेश द्वार और उसका मंदिर ही बचा है।

यहाँ पर एक और प्रथा बहुत प्रसिद्ध है नवरात्र में जहां एक ओर लोग मांस और मदिरा के सेवन से बचते हैं, तो वहीं उज्जैन में एक मंदिर ऐसा भी है, जहां माता को मदिरा पिलाई जाती है।शारदीय नवरात्री की महाष्टमी पर कलेक्टर दोनों देवियों को मदिरा पिलाकर शासकीय पूजा करते है । इसके बाद नगर के अन्य देवी व भैरव मंदिर में पूजा होती है । इतना ही नहीं इस मंदिर में आने वाले भक्तों को भी प्रसाद के रूप में शराब ही बांटी जाती है।महाअष्टमी के दिन उज्जैन में लोक कल्याण के साथ सुख, समृद्धि के लिए 24 खंभा माता मंदिर में नगर पूजा का आयोजन किया जाता है।इसकी शुरुआत शासकीय पूजन के साथ होती है, जिसमें खुद कलेक्टर माता को मदिरा का भोग लगाते हैं।माता के इस मंदिर में सुबह से ही पूजा शुरू हो जाती है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

२४ खम्बा माता मंदिर
२४ खम्बा माता मंदिर

कलेक्टर के मदिरा का भोग चढ़ाने और आरती के बाद चल समारोह निकाला जाता है, जिसमें मदिरा की धार निकाली जाती है और शहर के आसपास स्थित देवी और भैरव मंदिरों में जाकर पूजा की जाती है।इस दौरान तांबे के कलश में मदिरा लेकर एक सेवक चल समारोह के आगे चलता है जिससे मदिरा की धार लगातार जारी रहती है।शारदीय नवरात्रि में उज्जैन में नगर पूजा की परंपरा हजारों साल पुरानी है।मान्यता है कि उज्जयिनी के महान सम्राट विक्रमादित्य लोक कल्याण और राज्य की प्रजा की सुख शांति और समृद्धि के लिये नगर पूजा करते थे।तभी से नगर पूजा की ये परंपरा चली आ रही है।रियासत काल में सिंधिया राजघराने द्वारा ये परंपरागत पूजा की जाती थी।आजादी के बाद जिले के मुखिया होने के नाते कलेक्टर नगर पूजा की ये परंपरा निभाने लगे और नगर पूजा करने लगे।

॥ जय माँ २४ खम्बा माता ॥