रहस्यमय मंदिर जहां पूजा करने पर लगता है श्राप..!!जानिए इसकी वजह..!!!!

रहस्यमय मंदिर जहां पूजा करने पर लगता है श्राप..!!जानिए इसकी वजह..!!!!

रहस्यमय मंदिर जहां पूजा करने पर लगता है श्राप
रहस्यमय मंदिर जहां पूजा करने पर लगता है श्राप

भारत में एक मंदिर ऐसा भी है जहां पूजा करने पर श्राप मिलता है।आपको ये सुनकर बहुत आश्चर्य होगा जहाँ एक तरफ लोग मंदिर में आस्था और विश्वास लेकर इसीलिए जाते हैं ताकि उनकी मनोकामनाएं पूरी हो जाएं वहीँ अगर ऐसा कुछ अजीब सुनने को मिले तो आश्चर्य होना स्वाभाविक है।असल में आलम यह है कि सदियों से इस मंदिर में किसी ने पूजा ही नहीं की है। इसलिए भगवान शिव के इस मंदिर में भक्त सिर्फ दर्शन करने आते हैं, पूजा कोई नहीं करता है।

यह मंदिर देवभूमि उत्तराखंड के पिथौरागढ़ क्षेत्र में हैं। मंदिर बल्तिर गांव में बना है। पिथौरागढ़ से गांव की दूरी महज 6 किमी है। शिव का यह मंदिर स्थापत्य कला के कारण भी प्रसिद्ध है। मंदिर हथिया देवाल के नाम से भी मशहूर है।इस श्रापित देवालय का हथिया देवाल नाम कैसे रखा गया इसके पीछे एक बेहद रोचक कहानी है।बहुत पुरानी बात है यहां कभी राजा कत्यूरी का शासन था। राजा स्थापत्य कला को बेहद महत्व देता था। राजा ने क्षेत्र में मंदिर बनवाया। इस मंदिर को एक कुशल कारीगर ने एक हाथ से बनाया था।

क्योंकि उसका एक हाथ किसी दुर्घटना के कारण नहीं था। जब वह मूर्तियां बनाने की कोशिश कर रहा था, तो लोग उसे देख हंसी उड़ा रहे थे। तब उसने प्रण लिया कि वह एक हाथ से ही पूरा मंदिर बनाएगा।इस तरह उस एक हाथ के कारीगर ने एक चट्टान को रात भर में काटकर मंदिर बनाया। उस मंदिर में एक शिवलिंग को भी बनाया गया। हालांकि शिवलिंग को रातों-रात बनाया गया। उसमें प्राण प्रतिष्ठित नहीं किए गए। इसलिए इस मंदिर में शिवलिंग की पूजा नहीं की जाती है।

धीरे-धीरे यह परंपरा का रूप बन गई। और लोगों के बीच यह मान्यता का जन्म हुआ कि यदि कोई व्यक्ति इस शिव मंदिर में पूजा करेगा तो उसे भगवान शिव श्राप देंगे। जो परंपरा आज तक चली आ रही है।

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