जानिये क्या किया था शिव जी ने मकर सक्रांति पर …..

14 जनवरी को सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते है. दक्षिण  भारत में तमिल वर्ष की शुरूआत इसी दिन से होती है. वहाँ यह पर्व ‘थई पोंगल’ के नाम से जाना जाता है. सिंधी लोग इस पर्व को ‘तिरमौरी’ कहते है. उत्तर भारत में यह पर्व ‘मकर सक्रान्ति के नाम से और पंजाब में लोहडी पर्व (13 जनवरी), उतराखंड में उतरायणी, गुजरात में उत्तरायण, केरल में पोंगल, गढवाल में खिचडी संक्रान्ति के नाम से मनाया जाता है.

 

मकर संक्रान्ति से जुडी मान्यताएं :-

  1. एक मान्यता के अनुसार आज के दिन शिवजी ने अपने साधको पर विशेष रुप से ऋषियों पर कृ्पा की थी. एक अन्य मत के अनुसार इस दिन शिव ने विष्णु जी को आत्मज्ञान का दान दिया था.
  2. देवतों के दिनों की गणना इस दिन से ही प्रारम्भ होती है. सूर्य जब दक्षिणायन में रहते है तो उस अवधि को देवताओं की रात्री व उतरायन के 6 माह को दिन कहा जाता है. मनुष्य के छ: माह के बराबर देवताओं की एक दिन व एक रात्रि होती है.
  3. इसके अतिरिक कहा जाता है कि सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने उसके घर जाते है. सूर्य- शनि का यह मिलाप “मकर संक्रान्ति के रुप में मनाया जाता है.
  4. इस मान्यता से सभी अवगत होगें, कि महाभारत की कथा के अनुसार भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिये मकर संक्रान्ति का दिन ही चुना था.
  5. कहा जाता है कि आज ही के दिन गंगा जी ने भगीरथ के पीछे- पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थी. इसीलिये आज के दिन गंगा स्नान व तीर्थ स्थलों पर स्नान दान का विशेष महत्व माना गया है.

 

मकर संक्रान्ति के दिन से मौसम में बदलाव आना आरम्भ होता है. यही कारण है कि रातें छोटी व दिन बडे होने लगते है. मकर संक्रान्ति के दिन खाई जाने वाली वस्तुओं में जी भर कर तिलों का प्रयोग किया जाता है. तिल का उबटन, तिल के तेल का प्रयोग, तिल मिश्रित जल से स्नान, तिल मिश्रित जल का पान, तिल- हवन, तिल की वस्तुओ का सेवन व दान, इनमें से कुछ भी करना व्यक्ति के पापों में कमी और पुन्यों में वृ्द्धि करता है.

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