महिलाएँ गहने क्यों पहनती हैं..?जानिए क्या कहती है रामायण इस विषय में..!!!

महिलाएँ गहने क्यों पहनती हैं..?जानिए क्या कहती है रामायण इस विषय में..!!!

सीताजी को जब सात फेरे लेने के लिए सजाया जा रहा था तब उनकी माँ ने उन्हें १६ श्रृंगार के बारे में बताया,आइये हम भी जानते है गहने क्यों पहने जाते है क्या कहती है रामायण इस विषय में।

  • मेहंदी लगाने का अर्थ है कि जग में अपनी लाली तुम्हें बनाए रखनी होगी।
  • काजल लगाने का अर्थ है कि शील का जल आंखों में हमेशा धारण करना होगा अब से तुम्हें।
  • बिंदिया लगाने का अर्थ है कि आज से तुम्हें शरारत को तिलांजलि देनी होगी और सूर्य की तरह प्रकाशमान रहना होगा।
  • नथ का अर्थ है कि मन की नथ यानी किसी की बुराई आज के बाद नहीं करोगी, मन पर लगाम लगाना होगा।

  • टीका यश का प्रतीक है, तुम्हें ऐसा कोई कर्म नहीं करना है जिससे पिता या पति का घर कलंकित हो, क्योंकि अब तुम दो घरों की प्रतिष्ठा हो।
  • बंदनी का अर्थ है कि पति, सास ससुर आदि की सेवा करनी होगी।
  • पत्ती का अर्थ है कि अपनी पत यानी लाज को बनाए रखना है, लाज ही स्त्री का वास्तविक गहना होता है।
  • कर्णफूल का अर्थ है कि दूसरो की प्रशंसा सुनकर हमेशा प्रसन्न रहना होगा।
  • हंसली का अर्थ है कि हमेशा हंसमुख रहना होगा सुख ही नहीं दुख में भी धैर्य से काम लेना।

  • मोहनमाला का अर्थ है कि सबका मन मोह लेने वाले कर्म करती रहना।
  • नौलखा हार का अर्थ है कि पति से सदा हार स्वीकारना सीखना होगा
  • कड़े का अर्थ है कि कठोर बोलने का त्याग करना होगा
  • बांक का अर्थ है कि हमेशा सीधा-सादा जीवन व्यतीत करना होगा
  •  छल्ले का अर्थ है कि अब किसी से छल नहीं करना

  • पायल का अर्थ है कि बड़ी बुढ़ियो के पैर दबाना, उन्हें सम्मान देना क्योंकि उनके चरणों में ही सच्चा स्वर्ग है ।
  • अंगूठी का अर्थ है कि हमेशा छोटों को आशीर्वाद देते रहना।

माँ ने सीता जी को बताया आज के बाद तुम्हारा तो कोई अस्तित्व इस दुनिया में है ही नहीं, तुम तो अब से पति की परछाई हो, हमेशा उनके सुख-दुख में साथ रहना, वही तेरा श्रृंगार है और उनके आधे शरीर को तुम्हारी परछाई ही पूरा करेगी।

 

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