महाशिवरात्रि पूजन विधि और पूजन का मतलब.. ज़रूर पढ़े और ज्ञान अर्जित करे…!!

महाशिवरात्रि  : हम हिन्दुओ का एक प्रमुख त्यौहार है, और महादेव शिव तथा उनके भक्तो का प्रिय पर्व भी. पुराणों के अनुसार महादेव शिव इसी दिन ब्रह्मा जी से रूद्र के रूप में अवतरित हुए थे. इसके साथ प्रलय के समय भी भगवान शिव इसी दिन तांडव नृत्य करते थे और अपने तीसरे आँख से प्रलय लाते थे.

अनेक स्थानों पर यह भी मान्यता है इस दिन महादेव शिव   का जगत जननी देवी पार्वती के साथ विवाह हुआ था.

व्रती दिनभर शिव मंत्र (ऊं नम: शिवाय) का जाप करें तथा पूरा दिन निराहार रहें। (रोगी, अशक्त और वृद्ध दिन में फलाहार लेकर रात्रि पूजा कर सकते हैं।) शिवपुराण में रात्रि के चारों प्रहर में शिव पूजा का विधान है। शाम को स्नान करके किसी शिव मंदिर में जाकर अथवा घर पर ही पूर्व  या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके त्रिपुंड एवं रुद्राक्ष धारण करके पूजा का संकल्प इस प्रकार लें-

 

ममाखिलपापक्षयपूर्वकसलाभीष्टसिद्धये शिवप्रीत्यर्थं च शिवपूजनमहं करिष्ये

व्रती को फल, फूल, चंदन, बिल्व पत्र, धतूरा, धूप व दीप से रात के चारों प्रहर पूजा करनी चाहिए साथ ही भोग भी लगाना चाहिए। दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अलग-अलग तथा सबको एक साथ मिलाकर पंचामृत से शिवलिंग को स्नान कराकर जल से अभिषेक करें।
चारों प्रहर के पूजन में शिवपंचाक्षर
(नम: शिवाय) मंत्र का जाप करें। भव, शर्व, रुद्र, पशुपति, उग्र, महान, भीम और ईशान, इन आठ नामों से फूल अर्पित कर भगवान शिव की आरती व परिक्रमा करें।

अगले दिन  पुन: स्नान कर भगवान शंकर की पूजा करने के बाद व्रत का समापन करें।