दुनिया का एकमात्र शिवलिंग जो है महामृत्युंजय के रूप मे!!!यहां होती है अकाल मृत्यु से रक्षा!!!

यहां होती है अकाल मृत्यु से रक्षा!!!

आपने पंडितों और ज्योतिशो को महामृत्युंजय जाप के बारे मे केह्ते हुए तोह सुना ही होगा जेसा की हम सभी जानते है कि महामृत्युंजय मंत्र बाबा भोलेनाथ का ही एक स्वरूप है जो अकाल मृत्यु व असाध्य रोग नाशक है।परंतु बाबा भोलेनाथ के इस स्वरूप के मंदिर दुनिया मे कम ही देखने को मिलते है।मान्यता है कि यहां शिव आराधना करने से आयु लंबी होती है और आने वाले संकट दूर होते हैं। इस शिवालय का महात्म्य द्वादश ज्योतिर्लिंगों के समतुल्य माना जाता है।

आज हम आपको ऐसे अध्बुध मँदिर के बारे मे बताने जा रहे है जहा शिवलिंग महामृत्युंजय के रूप मे स्थापित है।1001 छिद्रों वाले अदभुत श्वेत शिवलिंग विराजमान हैं । माना जाता है कि भगवान महामृत्युंजय के समक्ष महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से अकाल मृत्यु को भी टाला जा सकता है और अल्पायु दीर्घायु मे बदल जाती है।महामृत्युंजय शिवलिंग होने क़े कारण यहा भ्क्तो  की बहुत भीड़ होती है भक्तगण यहा आकर शिवलिंग की सच्चे मन से पूजा करते है।अज्ञात भय, बाधा और असाध्य रोगों को दूर करने और मनोकामना पूरी करने के लिए यहां मंदिर में भक्तो के द्वारा नारियल बांधा जाता है और बिल्व पत्र चढ़ाए जाते हैं।

 

यहां होती है अकाल मृत्यु से रक्षा!!!
यहां होती है अकाल मृत्यु से रक्षा!!!

महामृत्युंजय मंदिर मध्यप्रदेश के रीवा शहर में स्थित है। यहाँ1001 छेदों वाला अद्भुत शिवलिंग है। ये एक ऐसा शिवलिंग है जो आपको कही और देखने को नहीं मिलेगा। यहां भगवान शिव की मृत्युंजय के रूप में उपस्थित है। यहाँ आने वाले भक्तो की हर मनोकामना भगवान शिव पूरी करते है। इस मंदिर में दर्शन करने से सभी रोग नष्ट हो जाते है।

यह शिवलिंग सफ़ेद रंग का है।इस शिवलिंग पर मौसम का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। ऐसा माना जाता है की भगवान शिव के इस मंदिर में महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से अकाल मृत्यु के भय खत्म हो जाता है। यहां पर मांगी हुई मन्नत पूरी होने के बाद नारियल बांधा जाता है। और शिवलिंग पर बिल्व पत्र चढ़ाया जाता है।

शिव पुराण के अनुसार देवाधिदेव महादेव ने महा संजीवनी महामृत्युंजय मंत्र की उत्पत्ति की थी। शिव ने इस मंत्र का गुप्त रहस्य माता पार्वती और दैत्यों के गुरू और महान शिव भक्त शुक्राचार्य को बताया था।

महामृत्युंजय मंत्र के जप का उल्लेख शिवमहापुराण के अलाव अन्य हिंदू धर्म ग्रंथों में मिलता है। महामृत्युंजय मंत्र के जप करने के बारे में ज्योतिषी भी सलाह देते हैं।

 

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