“महामृत्युंजय मंत्र” क्यों है भोले शंकर का प्रिय मंत्र ; जाने क्या है मंत्र जाप के लाभ..!!!!

महामृत्युंजय मंत्र- भारतीय पौराणिक कहानी(Indian Mythological Story)

देवो के देव महादेव(Mahadev) सभी भक्तों पर अपनी कृपा करते है। महामृत्युंजय मंत्र(Mahamrityunjay Mantra) भोलेनाथ(Bholenath) का प्रिय मंत्र है यह एक ऐसा अचूक बाण है जो आपके सभी कष्टों को नष्ट कर आपके जीवन को खुशहाल बनाता है,इसलिए यह मंत्र(mantra) भगवान्(Bhagwaan)को अतिप्रिय है ।

महामृत्युंजय मंत्र
महामृत्युंजय मंत्र

ॐ ह्रौं जूं सः। ॐ भूः भुवः स्वः।

त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।

उर्वारुकमिव बन्धवान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

स्वः भुवः भूः ॐ। सः जूं ह्रौं ॐ ॥

घातक व जटिल स्थिति में भी यह मंत्र(mantra) आपकी परेशानियों को समाप्त करता है। बतादें इस मंत्र(mantra) का जाप पूरी श्रद्धा व पवित्र हृदय से करना चाहिए, मन में किसी भी प्रकार की शंका होने पर मंत्र(mantra) का जाप निष्फल या विपरीत प्रभाव पैदा करने वाला भी हो सकता है।

मृत्युंजय महादेव
मृत्युंजय महादेव

मृत्युंजय मंत्र(Mahamrityunjay Mantra) भगवान शिव(Shiv) का प्रिय मंत्र(mantra) होने का एक कारण यह है की मृत्युंजय(Mahamrityunjay ) महादेव का दूसरा नाम है। जब किसी भी तरह के कर्मकांड व पूजा-आराधना से आपके कष्टों का निवारण न हो पाए, तो ऐसे में महामृत्युंजय मंत्र(Mahamrityunjay Mantra) का जाप एक ऐसा अमोघ बाण है जो आपके सभी कष्टों को भेदकर आपका जीवन सुखमय बनाता है।

मृत्युंजय(Mahamrityunjay ) शिव(Shiv) मृत्यु को जीतने वाले हैं।जब आपको जीवन में आपको लगे कि सारे रास्ते बंद हो गए हैं, सभी उपाय व प्रयास व्यर्थ जा रहे हैं तो ऐसे में महामृत्युंजय मंत्र(Mahamrityunjay Mantra) आपकी मनोकामना सिद्धि कर आपको जीवन में एक नई राह देता है। महामृत्युंजय मंत्र(Mahamrityunjay Mantra) का जाप और हवन अत्यंत शुद्ध हृदय व पवित्र भाव से करना चाहिए, अन्यथा महामृत्युंजय मंत्र(Mahamrityunjay Mantra) का जाप निष्फल या विपरीत प्रभाव भी पैदा कर सकते हैं।

भोलेनाथ
भोलेनाथ

इसे शास्त्रों में दोधारी तलवार भी कहा गया है।  जीवन की सभी समस्याओं से उबरने में महामृत्युंजय मंत्र(Mahamrityunjay Mantra) का जाप सहायक व अत्यंत प्रभावशाली है।

महामृत्युंजय मंत्र

मृत्युंजय शिव सब प्रकार की मृत्यु सामने होने पर सहायक हैं। विचारशील लोगों ने मृत्यु के आठ रूप माने हैं।

1.शर्मन्दगी, 2. अपमान, 3. बदनामी व आलोचना, 4. बड़ा शोक, 5. घोर पीड़ा, 6. असहनीय रोग, 7. भयाक्रान्त, 8. मृत्यु।

इनमें से किसी भी प्रकार का कष्ट हो तो निसंकोच मृत्युंजय शिव की शरण में जाइए सब कुछ शुभ ही शुभ होगा। घातक व जटिल स्थिति में महामृत्युंजय मंत्र(Mahamrityunjay Mantra) का सहारा कष्टों से मुक्ति दिलाता है।

देवो के देव महादेव
देवो के देव महादेव

सारे मुख्य मृत्युंजय मंत्रों में शामिल होने के कारण है मूल त्र्यम्बक मंत्र(mantra)। स्वास्थ्य रक्षा, आयु रक्षा और श्री वृद्धि के लिए नित्य जाप कर सकते हैं। मृत्युंजय मंत्र का खास तौर से साधारण रोगावस्था में अथवा शोकावस्था में जाप करना अत्यंत लाभकारी है।

अपने नाम के ही अनुरूप महामृत्युंजय(Mahamrityunjay Mantra) मृतसंजीवनी मंत्र असाध्य रोगों की शान्ति, रोगी को असहनीय कष्ट, जटिल रोग की पहचान कराने में और प्राण छूटने में अनावश्यक देरी हो रही हो, तो उस स्थिति में मंत्र का जाप जातक को पीड़ा से मुक्ति दिलाता है।

महामृत्युंजय मंत्र भोले शंकर का प्रिय मंत्र
महामृत्युंजय मंत्र भोले शंकर का प्रिय मंत्र

महामृत्युंजय मंत्र(Mahamrityunjay Mantra) के जाप, यज्ञ, हवन में प्रयुक्त होने वाली हवन सामग्री द्वारा आहुति देने से भी अलग-अलग लाभ प्राप्त होते हैं। घी से आयु रक्षा, घी लगी दूब से महारोग, शहद व घी से मधुमेह, घी, शहद, शक्कर व साबुत मसूर से मुंह के रोग। घी लगी आक की लकड़ी या पत्ते से स्वास्थ्य और शरीर की रक्षा।  ढाक के पत्ते से नेत्ररोग, बेल पत्ते या फल से पेट के रोग। भांग, धतूरा या आक से मनोरोग। गूलर समिधा, आंवले या काले तिल से शरीर का दर्द, ढाक की समिधा या पत्ते से सभी रोगों से मुक्ति। दूध में डूबे आम के पत्तों से जटिल बुखार दूर होता है।

 

॥ जय मृत्युंजय जय महाकाल ॥