सबसे बड़े महामंत्र कोनस है..!!!! क्या है इसके फ़ायदे..!!

हिन्दू धर्म में पूरणो और वेदो के अनुसार ॐ नमः शिवाय का मन्त्र खुद में इतना सर्वशक्तिमान , सर्वशक्तिशाली तथा सम्पूर्ण ऊर्जा का श्रोत है की मात्र इसके उच्चारण से ही समस्त दुखो, कष्टो का विनाश होता है तथा हर कामना की प्रतिपूर्ति हो जाती है. ॐ अक्षर के बिना किसी घर की पूजा पूर्ण नही मानी जाती, आपने अक्सर धर्मिक जगह में हो रही कथाओ, पाठों व आरतियों में ॐ का उच्चारण अवश्य ही सुना होगा. कहते है बिना ओम के सृष्टि की कल्पना भी नही करी जा सकती व सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड से सदा ओम की ध्वनि निकलती है.

ओम तीन अक्षरो अ, उ तथा म से मिलकर बना है जिनमे अ का अर्थ होता है उत्तपन होना, उ का अर्थ है उठना यानि विकास होना तथा म का अर्थ है मौन धारण करना यानी ब्रह्मलीन हो जाना.
सबसे-बड़ा-मंत्र-महामंत्र– ओम अक्षर से कई दिव्य शक्तिया व बहुत गहरे अर्थ जुड़े हुए है जिसे अलग-अलग पुरानो व शास्त्रो में विस्तृत ढंग से बताया गया है. शिव पुराण में ओम को प्रणव नाम से पुकारा गया है जिसमे प्र से अभिप्राय प्रपंच, न यानी नही, वः यानी तुम लोगो के लिए. इस तरह प्रणव शब्द का सार है, इस संसारिक जीवन के प्रपंच यानी कलेस, दुःख आदि से मुक्ति पाकर जीवन का वास्तविक एकमात्र लक्ष्य मोक्ष को पा जाना. दूसरे अर्थो में प्रणव के, ”प्र” यानी संसार रूपी सागर को ”नव” यानी नाव द्वारा पार करवाने वाला तरीका बताया गया है.

ओम के उच्चारण द्वारा व्यक्ति को मानसिक पीड़ा से मुक्ति मिलती है तथा उसके मन और विचार में शुभ प्रभाव पड़ता है. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, ओम का उच्चारण करते समय गले में कंपन पैदा होती है जो थाइराइड के उपचार के लिए सकरात्मक होती है. ओम के उच्चारण द्वारा व्यक्ति के फेफड़ो में शुद्ध वायु का प्रवाह होता है जो उसके शरीर के लिए लाभदायक है. ओम के प्रभाव से मनुष्य की मानसिक शांति के आलावा उसके हार्मोन व खून का दबाव भी नियंत्रित होता है जिस से मनुष्य के अंदर शुद्ध रक्त प्रवाह होने के कारण उसे कभी भी कोई बीमारी नही होती. यदि किसी व्यक्ति को घबराहट महसूस होती है तो उस आँखे बंद कर पांच मिनट ओम का उच्चारण करना चाहिए. ओम का उच्चारण व्यक्ति के शरीर के विषैले तत्वों को दूर कर उसे तनाव मुक्त करता है !