महालक्ष्मी पूजन 2020 : इस दीपावली ऐसे करें 12 राशियों के अनुसार शुभ पूजा :

आज का पर्व प्रकाश का त्यौहार है। दीपावली का मतलब है प्रकाश का त्यौहार। आप में से हर कोई अपने आप में प्रकाशमयी है। यह त्यौहार सारे भारत, नेपाल, सिंगापुर, मलेशिया, श्रीलंका, इंडोनेशिया, मॉरीशस, सूरीनाम, त्रिनिदाद तथा दक्षिण अफ्रीका में मनाया जाता है। लोग एक दूसरे को दिवाली की शुभ कामनाएं देते हैं तथा मिठाइयाँ बाँटते हैं। दिवाली के दिनों हम अतीत के सारे दुःख भूल जाते हैं। जो कुछ भी दिमाग में भरा पड़ा हो, आप पटाखे चलाते हो तथा सब भूल जाते हो। पटाखों की तरह अतीत भी चला जाता है,सब जल जाता है तथा मन नया बन जाता है। यही दिपावाली है।तो आइए जानते है राशिनुसार कैसे करे माता लक्ष्मी की पूजा:

मेष तथा वृश्चिक राशि वाले लाल चंदन या मूंगे की 108 दानों की माला से लाल ऊन का आसन बिछाकर माता लक्ष्मीजी का मंत्र जपें।

वृषभ तथा तुला राशि वाले स्फटिक की माला लें तथा सफेद ऊन का आसन बिछाकर जाप करें।

मिथुन तथा कन्या राशि वाले हरे मनकों की माला व हरे ऊन का आसन बिछाकर जप करें।

कर्क राशि वालों के लिए मोती की माला तथा सफेद ऊन का आसन बिछाकर जपें।

सिंह राशि वाले गुलाबी मनकों की माला तथा गुलाबी ऊन के आसन पर जाप करें।

धनु तथा मीन राशि वाले चंदन की माला तथा पीले ऊन के आसन को बिछाकर मंत्रों का जाप करें।

मकर तथा कुंभ राशि वाले यंत्र की पूजा करें तथा महानिशीथकाल में माता लक्ष्मी के मंत्रों का जाप श्रेष्ठ रहेगा।

महानिशीथकाल में माता लक्ष्मीजी के तांत्रिक प्रयोग किए जाते हैं। इस समयावधि में माता लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करना श्रेष्ठ माना जाता है। हम यहां पर कुछ चुने हुए मंत्र दे रहे हैं जिन्हें विधिपूर्वक जपने से माता लक्ष्मीजी की कृपा बनी रहती है।

महानिशीथकाल का समय 22.46 से लेकर मध्यरात्रि में 1.19 बजे तक रहेगा। इस समयावधि में अमृत तथा चंचल का चौघड़िया है।

◆ ॐ श्रीं ह्रीं कमले कमलालये। प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमं। ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं ॐ स्वाहा।

◆ ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं एं ॐ स्वाहा।

◆ ॐ विष्णु पत्नीयै लक्ष्मी नमरू।