भगवान शिव की पूजा से भी लगता है ये श्राप!!जानिये क्या है इसका रहस्य!!

भगवान शिव की पूजा से भी लगता है ये श्राप!!

ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव शंकर  की पूजा अर्चना  से सभी  परेशानियो से मुक्ति मिल जाती है ,लेकिन  आपको यह जरा भी नहीं मालूम होगा कि समस्त शिव भोले के भक्तों को एक श्राप भी मिला है जिसके पुरे होते ही सौभाग्य को दु्र्भाग्य में बदलते  ज़रा भी  देर नहीं लगती।तोह आइये जानते है की वो श्राप कोन सा है।
प्रचलित कथा 

शिव पुराण की कथा के अनुसार एक बार सती के पिता दक्ष ने विशेष  धार्मिक कार्यक्रम काआयोजन किया । उसमें महादेव भी आमंत्रित  हुए थे लेकिन  उन्होंने खुद को  ईश्वर होने की मर्यादा का पालन करने के चलते  दक्ष को प्रणाम नहीं किया । दक्ष इस बात का बुरा मान गए। और उन्होंने कहा कि आपके  भगवान होने के नाते न सही, लेकिन उनका दामाद होने के नाते से भोलेनाथ को प्रणाम करना ही चाहिए था।

शिव शंकर  के साथ  ब्राह्मणों को भी मिला श्राप

इस बात से नाराज होकर दक्ष ने शिव शंकर  को श्राप दिया और कहा कि उन्हें कभी  किसी  यज्ञ में कोई भाग नहीं मिलेगा।  शिव भोले  को श्राप मिलने के कारण नाराज नन्दी ने दक्ष को बकरे जैसा देह धारण करने और  पुरे जीवन भर अभिमानी और कामी बन जीवन भर लोगों से अपमानित होने का श्राप दे दिया। और नन्दी ने ही धार्मिक आयोजन में मौजूद सभी ब्राह्मणों को भी साथ ही साथ श्राप देते हुए कहा कि ये सभी विद्वान पंडित तथा ज्ञानी होने पर भी अपने बुढ़ापे में ज्ञान रहित हो जाए और  दरिद्र , गरीब होकर जीवन बिताएंगे । और इन विद्वानों को  अपने जीवनयापन के लिए सभी जातियों के घर-घर जाकर भीख मांगनी पड़ेगी ।

शिव भक्तों को भी लेना पड़ा था ये श्राप
नन्दी के द्वारा दिए गए  श्राप से क्रोधित होकर  भृगु ऋषि ने भी समस्त शिव के  भक्तों को श्राप दिया कि जो कोई भी महादेव  का व्रत तथा पूजन करेगा, वे सभी भक्त वेद-शास्त्रों से विपरीत चलेंगे। बाल और जटा धारण कर भस्म मलकर शिव भोले के साधक बनेंगे। वे लोग शराब ,मदिरा, मांस भक्षण  और कनफटे होंगे। उनका रहने का स्थान श्मशान होगा।

भगवान शिव शंकर
भगवान शिव शंकर

अभी भी अघोर रूप में रहते हैं भगवान भोलेनाथ

भगवान महादेव  ने भृगु ऋषि के इस शाप को स्वीकार करने के साथ ही अघोर रूप ले लिया तथा सृष्टि के अंत तक जीवन पर रहने का विचार किया। महादेव भक्त भी  अघोरी के  शाप की पालना करते हुए श्मशान में ही निवास करते है। शरीर पर भस्म राख  रमाते हैं और तंत्र मंत्र मार्ग पर चलते हुए वामाचार से ईश्वर,शिव की  आराधना करते हैं।

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