इस मातृ दिवस पर पढ़िए..!!!माँ सा निःस्वार्थ तो ईश्वर भी नहीं होता हैं..!!!

इस मातृ दिवस पर पढ़िए..!!!माँ सा निःस्वार्थ तो ईश्वर भी नहीं होता हैं..!!!

क्या कभी ईश्वर बिन पूजे रहता हैं नहीं ना हर व्यक्ति किसी न किसी तरह से भगवान को मानता हैं उनको पूजता हैं ।ईश्वर भी एक तरह से स्वार्थी होते हैं स्वार्थी कैसे क्योंकि वो चाहते हैं भक्त उनके पास आये उनको पूजे ।लेकिन क्या आप जानते हैं इस पूरी दुनिया में एक माँ ही ऐसी हैं जो निःस्वार्थ भाव से अपने बच्चे को प्यार देती हैं दुलार देती हैं इसलिए तो माँ को जादू भी कहा जाता हैं ।हर माँ बच्चे की सबसे पहली शिक्षक सबसे पहली वैद्य सबसे बड़ी हकीम होती हैं जो बच्चे के बिन कहे उसका दर्द महसूस कर लेती हैं और उसे ठीक करने में जी जान लगा देती हैं। कहा जाता हैं ईश्वर की सबसे बड़ी देन होती हैं माँ।भगवान खुद कहते हैं मैं हर जगह मौजूद नहीं रह सकता हूँ इसलिए उन्होंने माँ को बनाया हैं।

माँ के चेहरे में ही जादू का होता हैं वो अगर दिख जाए तो सुकून सा मिल जाता हैं। हर एक के जीवन में माँ एक अनमोल इंसान के रुप में होती है जिसके बारे शब्दों से बयाँ नहीं किया जा सकता है। माँ के साथ कुछ महत्वपूर्ण क्षणोँ को वर्णित किया जा सकता है। एक माँ हमारे जीवन की हर छोटी बड़ी जरुरतो का ध्यान रखने वाली और खूबसूरत इंसान होती है। वो बिना किसी अपने व्यक्तिगत लाभ के हमारी हर जरुरत के लिये हर पल ध्यान रखती है। किसी के भी जीवन में एक माँ पहली, सर्वश्रेष्ठ और सबसे अच्छी व महत्त्वपूर्ण होती है क्योंकि कोई भी उसके जैसा सच्चा और वास्तविक नहीं हो सकता। वो एकमात्र ऐसी है जो हमेशा हमारे अच्छे और बुरे समय में साथ रहती है।हमारे जीवन में माँ के रुप में कोई भी नहीं हो सकता है। इसलिए हमें भी हमेशा पूरे जीवन भर अपने माँ का ख्याल रखना चाहिए उन्हें प्यार करना चाहिए ।

 

॥ जय मातृ देवो भवः ॥

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