पढ़िए माँ नर्मदा के आजीवन अविवाहित रहने का रहस्य..!!!

पढ़िए माँ नर्मदा के आजीवन अविवाहित रहने का रहस्य..!!!

नर्मदा नदी को मध्य प्रदेश का विशेष हिस्सा माना जाता है
नर्मदा नदी को मध्य प्रदेश का विशेष हिस्सा माना जाता है

नर्मदा नदी के बारे में कहा जाता है यहाँ से निकलने वाले प्रत्येक कंकर तथा पत्थर में शिव वास होता है। नर्मदा नदी को मध्य प्रदेश का विशेष हिस्सा माना जाता है। आइये आज जानते है क्यों माँ नर्मदा ने अविवाहित रहने का प्रण लिया ।

राजा मैखल ने नर्मदा के विवाह के लिए एक शर्त रखी कि जो राजकुमार गुलबकावली के फूल लेकर मेरी बेटी को देगा उससे इसका विवाह तय कर दिया जाएगा। नर्मदा से शादी करने का मौका सोनभ्रद नाम के एक राजकुमार को मिला था।

अब विवाह में कुछ ही समय शेष था और सोनभ्रद से पहले कभी न मिले होने के कारण राजकुमारी नर्मदा ने अपनी दासी जुहिला के हाथ राजकुमार को एक संदेश भेजा। राजकुमारी के वस्त्र और गहने पाकर जुहिला सोनभ्रद को मिलने चली गई। वहां पहुँच कर जुहिला को राजकुमारी समझ कर सोनभ्रद उस पर मोहित हो गया। काफी समय बीतने के पश्चात जब जुहिला लौट कर ना आई तो राजकुमारी नर्मदा स्वयं सोनभ्रद से मिलने को चली गई। परन्तु

वहाँ जाकर उसने देखा कि जुहिला और सोनभ्रद एक दूसरे के साथ थे। यह दृश्य देख नर्मदा क्रोधित हो गई और घृणा से भर उठी। तुरंत वहां से विपरीत दिशा की ओर चल दी और कभी वापिस न आई।

उसके पश्चात से नर्मदा बंगाल सागर की बजाए अरब सागर में जाकर मिल गईं और उन्होंने कसम उठाई कि वे कभी भी विवाह नहीं करेंगी हमेशा कुंवारी ही रहेंगी।

कहा जाता है कि आज भी नर्मदा का विलाप और दुख की पीड़ा आज भी उनके जल की छल-छल की आवाज़ में सुनाई पड़ती है। भारत देश की सभी विशाल नदियां बंगाल सागर में आकर मिलती है किन्तु नर्मदा एक ऐसी नदी है जो बंगाल सागर के बदले अरब सागर की ओर जाकर मिलती है ।

 

॥ नर्मदे हर ॥

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