इस मंदिर में सोना-चांदी, मिट्टी के घोड़े चढ़ाने से होती है हर मन्नत पूरी !!

नवरात्रि में देवी मंदिरों, पंडालों व सभी शक्तिपीठों में भक्तों की भीड़ देखने को मिलती है। माता के दरबार में सभी माथा टेकने आते हैं और अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिये प्रार्थना करते हैं।

नवरात्रि में सभी देवी मंदिरों के दरबार सज जाते हैं तथा सभी की रौनक दोगुनी हो जाती है। वहीं अगर शक्तिपीठों की बात की जाए तो वहां की महीमा तो अपरंपार है। सभी शक्तिपीठों में माता अंम्बे के भक्त दर्शन के लिये पहुंचते हैं। ऐसा ही एक शक्तिपीठ हिरयाणा के कुरुक्षेत्र में स्थित है। तो आइए जानते हैं इस शक्तिपीठ के बारे में…

हरियाणा के कुरुक्षेत्र में भद्रकाली का परमशक्ति पीठधाम है। 52 शक्तिपीठों में से श्रीदेवी कूप भद्रकाली मंदिर का विशेष महत्व है। इस महाशक्तिपीठ में नवरात्रि के दौरान विशेष महाउत्सव मनाया जाता है। ऐसाकहा जाता है कि शक्तिपीठों में माता सती का निवास रहता है। क्योंकि यहां पर माता सती के अंग गिरे थे। इसलिये इन जगहों पर शक्तियों का संचार होता है।

यहां गिरा था मां के बाएं पैर का घुटना :

भद्रकाली शक्तिपीठ में देवी सती का दांए पैर के घुटने के नीचे का भाग गिरा था। सती का दाए टखना इस मंदिर में बने कुएं में गिरा था, इसलिए इसे मंदिर को श्री देवीकूप मंदिर भी कहा जाता है। यह जगह थानेसर में है। यहां देवी काली की प्रतिमा स्थापित है तथा मंदिर में प्रेवश करते ही एक कमल का फूल बना है, जिसमें मां सती के दाएं पैर का टकना स्थापित है। मां सती का टकना सफेद संगमरमर से बना बहुत ही आकर्षक रुप से बना हुआ है।

मंदिर में चढ़ाए जाते हैं चांदी-सोने और मिट्टी के घोड़े :

यूं तो भद्रकाली शक्तिपीठ का अपना अलग ही महत्व है। भद्रकाली शक्तिपीठ में श्रीकृष्ण व बलराम का मुंडन हुआ था। जिससे इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। इसके अलावा मंदिर को लेकर ये भी मान्यता है कि यहां महाभारत काल में श्रीकृष्ण पांडवों के साथ भद्रकाली मंदिर में आए थे। उन्होंने विजय प्राप्त के लिए मां से मन्नत मांगी थी। युद्ध में विजय हासिल करने के बाद पांडवों ने मंदिर में आकर घोड़े दान किये थे, तब से यही प्रथा चल रही है। कुछ लोग यहां चांदी-सोने के घोड़े चढ़ाते हैं, तो कुछ लोग यहां मिट्टी के घोड़े चढ़ाते हैं।