नवरात्रि 2020 : जानिए मां अंबे के 9 रूपों के 9 शुभ वरदान !!

मां अंबे, मां दुर्गा, मां भगवती…चाहे नाम कोई भी हो इन 9 दिनों में वह भरपूर आशीष हमे देती है। 9 दिनों की 9 देवियां विशेष आशीर्वाद के लिए जानी जाती हैं।तो आइए जानते है किस देवी से मिलता है कौन सा शुभ वरदान…

◆ शैल पुत्री- मां दुर्गा का प्रथम रूप होता है शैल पुत्री। पर्वतराज हिमालय के यहां जन्म होने के कारण इन्हें शैल पुत्री कहा जाता है। नवरात्रि की प्रथम तिथि को शैलपुत्री की पूजन की जाती है। इनके पूजन से सभी भक्त सदा धन-धान्य से परिपूर्ण पूर्ण रहते हैं।

◆ ब्रह्मचारिणी- मां दुर्गा का दूसरा रूप ब्रह्मचारिणी होता है। मां दुर्गा का यह रूप भक्तों व साधकों को अनंत कोटि फल प्रदान करने वाली है। इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार तथा संयम की भावना जागृत होती है।

◆ चंद्रघंटा- मां दुर्गा का तीसरा स्वरूप चंद्रघंटा होता है। इनकी आराधना तृतीया को करि जाती है। इनकी उपासना से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। वीरता के गुणों में भी वृद्धि होती है। स्वर में दिव्य अलौकिक माधुर्य का समावेश होता है तथा आकर्षण बढ़ता है।

◆ कुष्मांडा- चतुर्थी के दिन मांं कुष्मांडा की आराधना होती है। इनकी उपासना से सिद्धियों, निधियों को प्राप्त कर समस्त रोग-शोक दूर होकर आयु तथा यश में वृद्धि होती है।

◆ स्कंदमाता- नवरात्रि का पांचवां दिन स्कंदमाता की उपासना का दिन रहता है। मोक्ष के द्वार खोलने वाली मा परम सुखदायी है। माँ अपने भक्तों की समस्त इच्छाओं को पूर्ण करती है।

◆ कात्यायनी- मां का छठवां रूप कात्यायनी होता है। छठे दिन इनकी पूजा-अर्चना होती है। इनके पूजा से अद्भुत शक्ति का संचार होता है। कात्यायनी साधक को दुश्मनों का संहार करने में सक्षम बना देती है। इनका ध्यान गोधूली बेला में करना चाहिए ।

◆ कालरात्रि- नवरात्रि की सप्तमी के दिन मांं काली रात्रि की आराधना का विधान होता है। इनकी पूजा-अर्चना करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और दुश्मनों का नाश होता है।

◆ महागौरी- देवी का आठवांं रूप है मांं गौरी । इनका अष्टमी के दिन पूजा का विधान है। इनकी पूजा पूरा संसार करता है। महागौरी की पूजा करने से समस्त पापों का क्षय होकर चेहरे की कांति बढ़ती है ,सुख में वृद्धि होती है और शत्रु-शमन होता है।

◆ सिद्धिदात्री- मां सिद्धिदात्री की आराधना नवरात्रि की नवमी के दिन करि जाती है। इनकी आराधना से जातक अणिमा, लघिमा, प्राप्ति,प्राकाम्य, महिमा, ईशित्व, सर्वकामावसांयिता, दूर श्रवण, परकाया प्रवेश, वाक् सिद्धि, अमरत्व, भावना सिद्धि आदि समस्तनव-निधियां की प्राप्त होती है।