क्यों स्थायी लक्ष्मी निवास के लिए ये 10 चीजें जरूरी हैं?अगर यह 10 चीजें ना हो तो माता लक्ष्मी का स्थायी निवास तो दूर पैर भी नहीं रखती!

क्यों स्थायी लक्ष्मी निवास के लिए ये 10 चीजें जरूरी हैं?

आप दिन भर न जाने कितना ही काम करते हैं लेकिन लक्ष्मी है कि प्रसन्न होने का नाम ही नहीं लेती। वहीं हम में से कुछ लोग तो ऐसे होते हैं जो उम्र भर कड़ी मेहनत करने के बाद भी रोजी-रोटी के जुगाड़ से ज्यादा नहीं कमा पाते।

वंदनवार -आम या पीपल के नए कोमल पत्तों की माला को वंदनवार कहा जाता है। इसे दीपावली के दिन पूर्वी द्वार पर बांधा जाता है। यह इस बात का प्रतीक है कि देवगण इन पत्तों की भीनी भीनी सुगंध से आकर्षित होकर घर में प्रवेश करते हैं। ऐसी मान्यता है कि दीपावली की वंदनवार पूरे 31 दिनों तक बंधी रखने से घर परिवार में एकता व शांति बनी रहती है।

स्वास्तिक – लोक जीवन में प्रत्येक अनुष्ठान के पूर्व स्वास्तिक का चिन्ह बनाया जाता है। उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम इन चारों दिशाओं को दर्शाती स्वास्तिक की चार भुजाएं ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास आश्रमों का प्रतीक मानी गई हैं। यह चिन्ह केसर, हल्दी या सिंदूर से बनाया जाता है।

कौड़ी – लक्ष्मी पूजन की सजी थाली में कौड़ी रखने की प्राचीन परंपरा है, क्योंकि यह धन और श्री का पर्याय है। कौड़ी को तिजौरी में रखने में लक्ष्मी की कृपा सदा बनी रहती है।

तिलक – पूजन के समय तिलक लगाया जाता है ताकि मस्तिष्क में बुद्धि, ज्ञान और शांति का चावल घर में कोई काला दाग नहीं लगने देता।

पान और चावल – ये भी दीप पर्व के शुभ मांगलिक चिन्ह है। पान घर की शुद्धि करता है तथा चावल घर में कोई काला दाग नहीं लगने देता।

बताशे या गुड़ – ये भी ज्योति पर्व के मांगलिक चिन्ह है। लक्ष्मी पूजन के बाद गुड़ बताशे का दान करने से धन में वृद्धि होती है।

ईख – लक्ष्मी के ऐराव्रत हाथी की प्रिय खाद्य सामग्री ईख है। दीपावली के दिन पूजन में ईख शामिल करने से ऐराव्रत प्रसन्न रहते हैं। इससे रिश्तों व वाणी की मिठास घर में बनी रहती है।

ज्वार का पोखरा – दीपावली के दिन ज्चार का पोखरा घर में रखने से धन में वृद्धि होती है तथा वर्ष भर किसी भी तरह के अनाज की कमी नहीं आती। लक्ष्मी के पूजन के समय ज्वार के पोखरे की पूजा करने से घर में हीरे मोती का आगमन होता है।

रंगोली – लक्ष्मी पूजन के स्थान तथा प्रवेश व आंगन में रंगों के संयोजन के द्वारा धार्मिक चिन्ह कमल, स्वास्तिक कलश, फूलपत्ती आदि अंकित कर रंगोली बनाई जाती है। कहते हैं कि लक्ष्मी जी रंगोली की ओर जल्दी आकर्षित होती हैं।