जाने क्यों कुंवारी लड़कियों को भूल से भी नही करनी चाहिए शिवलिंग की पूजा !!

जाने क्यों कुंवारी लड़कियों को भूल से भी नही करनी चाहिए शिवलिंग की पूजा !!

धार्मिक रीति-रिवाजों को लोग विशेष महत्ता प्रदान करते हैं…. धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि किसी भी धार्मिक कार्य को करते समय उसके नियमों का पालन करना आनिवार्य है। धार्मिक शास्त्रों में उल्लेखित किसी भी बात को अनदेखा करना उस जातक के लिए ही नुकसानदेह है, जो किसी विशेष पूजा से वरदान की अपेक्षा रखता है।हम इस बात को झुठला नहीं सकते कि नियमों का पालन करने के साथ हमारे धार्मिक शास्त्र अपने भक्तों को कुछ नियमों में विभाजित भी करते हैं। कौन से जातक किस प्रकार के धार्मिक कार्यों का हिस्सा बन सकते हैं एवं किन कार्यों में गलती से भी भाग नहीं ले सकते, इस सबका वर्णन धर्म ग्रंथों में किया गया है।

जाने क्यों कुंवारी लड़कियों को भूल से भी नही करनी चाहिए शिवलिंग की पूजा !!
जाने क्यों कुंवारी लड़कियों को भूल से भी नही करनी चाहिए शिवलिंग की पूजा !!

ऐसा ही एक नियम भगवान शिव के रूप ‘शिवलिंग’ से जुड़ा है, जिसके संदर्भ में यह माना जाता है कि कुंवारी कन्याएं शिवलिंग को हाथ भी नहीं लगा सकतीं। उनके द्वारा इस शिवलिंग की पूजा का ख्याल करना भी निषेध है। लेकिन ऐसा क्यों?

ऐसी मान्यता है कि लिंगम एक साथ योनि (जो देवी शक्ति का प्रतीक है एवं महिला की रचनात्मक ऊर्जा है) का प्रतिनिधित्व करता है. हालांकि शास्त्रों में ऐसा कुछ नहीं लिखा है। शिवपुराण के अनुसार यह एक ज्योति का प्रतीक है।कुछ सामाजिक धारणाओं के अनुसार शिवलिंग की पूजा सिर्फ पुरुष के द्वारा संपन्न होनी चाहिए न कि नारी के द्वारा। महिलाओं को शिवलिंग की पूजा से दूर ही रखा जाता है, खासतौर पर अविवाहित स्त्री को शिवलिंग पूजा से पूरी तरह से वर्जित रखा जाता है. परन्तु ऐसी मान्यताएं क्यों बनाई गई हैं?

और किसी स्त्री के कारण उनकी तपस्या भंग ना हो जाए, इसका ध्यान रखना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. हमेशा से ही जब भी भगवान शिव की पूजा की जाती है तो विधि-विधान का बहुत खयाल रखा जाता है।केवल मनुष्य जाति ही नहीं, देवता व अप्सराएं भी भगवान शिव की पूजा करते समय बेहद सावधानी से उनकी पूजा करती हैं।

लेकिन शिवलिंग की पूजा से अविवाहित स्त्रियों को दूर रखने का यह अर्थ नहीं है कि वे भगवान शिव की पूजा नहीं कर सकतीं।बल्कि कुंवारी कन्याएं ही शिव जी की सबसे अधिक आराधना करती हैं।अपने लिए एक अच्छे वर की कामना करते हुए वे पूर्ण विधि-विधान से शिव जी के 16 सोमवार का व्रत रखती हैं।

व्रत के साथ वे शिव जी की पूर्ण नियमों के साथ पूजा भी करती हैं. और ऐसी मान्यता है कि भक्तों के भोले भगवान शंकर उन्हें वरदान भी देते हैं।एक अच्छे वर के अलावा एक महिला का पति उससे प्रेम करे और अच्छा बर्ताव करे, इसके लिए भी महिलाएं 10 सोमवार का व्रत रखती हैं.इसके साथ ही पति-पत्नी का वैवाहिक जीवन सफल बना रहे, इसके लिए महिलाएं शिव तथा माता पार्वती जी की एक साथ पूजा करती हैं। हिन्दू मान्यताओं में दुनिया की सबसे श्रेष्ठ जोड़ी का श्रेय भगवान शिव एवं पार्वती जी को दिया गया है।

ऐसी मान्यता प्रसिद्ध है कि इन दोनों के प्रेम तथा स्नेह वाली जोड़ी पूरी दुनिया में और किसी की नहीं है। इसलिए भक्त अपने अच्छे विवाहित जीवन के लिए शिव एवं पार्वती की विधिपूर्वक पूजा करते हैं।