जानिए..!!!ऐसा क्या हुआ जो युधिष्ठर ने अपनी माता कुंती को ही दे दिया था श्राप..!!!!

जानिए..!!!ऐसा क्या हुआ जो युधिष्ठर ने अपनी माता कुंती को ही दे दिया था श्राप..!!!!

आज हम आपको महाभारत की एक ऐसी ही कहानी का जिक्र करने जा रहे हैं जिसका असर तब तक रहेगी जब तक यह दुनिया रहेगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस कथा में एक ऐसा श्राप छुपा हुआ है जिसमें पूरी नारी जाति ही शामिल है और यह श्राप उस समय मिला था जब महाभारत का महायुद्ध खत्म होने ही वाला था।

हम यहां जिस श्राप की बात करने जा रहे हैं वह महाभारत के 17वें दिन की सबसे बड़ी घटना मानी जाती है और यह घटना है कर्ण का वध अर्जुन के हाथों होना।

 

कर्ण की मृत्यु के बाद शवों के ढेर में जब कुंती ने कर्ण को देखकर रोना व अपन दुख प्रकट करना शुरू किया तो पांडव हैरान में रह गए कि उनकी माता आखिर शत्रु सेना के प्रधानसेनापति के शव पर क्यों आंसू बहा रही हैं। पांडवों ने हैरानी के साथ माता से कर्ण के शव पर रोने का कारण पूछा और कुंती ने जो जवाब दिया उसे सुनकर पांडवों के पैर के नीचे से जमीन ही खिसक गई थी।

कुंती ने रोते-रोते वहां मौजूद पांडवों को बताया कि कर्ण दरअसल उनका बड़ा भाई है। विवाह से पूर्व ही कर्ण का जन्म होने के कारण वह लोक लाज की वजह से इस रहस्य को छुपाए रखी थी।

 

कुंती के जवाब देने पर कि कर्ण उन पांडवों का ही भाई हैं युधिष्ठिर ने कहा कि हे माता आपने जो इतने बडे़ रहस्य को छुपाए रखा, जिसके कारण यह महाभारत का महायुद्ध हुआ और हम पांडव अपने ही भाई के हत्यारे बन बैठे। युधिष्ठिर ने आगे अपनी माता कुंती से कहा कि  मैं आपको सामने रखकर संपूर्ण नारी जाति को यह श्राप देता हूं कि वह कोई भी रहस्य छुपा नहीं सकेंगी।

माना जाता है कि युधिष्ठिर के इस श्राप का प्रभाव आज भी देखने को मिलता हैं इस श्राप के चलते ही पूरी नारी जाति की पेट में कोई बात नहीं बचती। वह कोई भी बात छुपा नहीं पाती।

 

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