जरूर पढ़िए..!!रावण के भाई कुम्भकर्ण का 6 महीने तक सोते रहने का रहस्य..!!!

जरूर पढ़िए..!!रावण के भाई कुम्भकर्ण का ६ महीने तक सोते रहने का रहस्य..!!!

रावण के भाई कुम्भकर्ण का ६ महीने तक सोते रहने का रहस्य
रावण के भाई कुम्भकर्ण का ६ महीने तक सोते रहने का रहस्य

कुंभकर्ण रावण का भाई था। कुंभकर्ण ने ब्रह्माजी से 6 महीने लंबी नींद का वरदान मांगा था। इस वरदान को ब्रह्माजी ने सहर्ष स्वीकार भी कर लिया था और उसी दिन से कुंभकर्ण 6 महीने की नींद में चला गया था। कुंभकर्ण कद में रावण से कई गुना बढ़ा था साथ ही वह बुद्धिमान और अच्छे हृदय का भी था। इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि जब रावण और राम का युद्ध हो रहा था। रावण ने कुंभकर्ण से मदद मांगी। लेकिन जब रावण ने पूरी सचाई कुंभकर्ण को बताई तब कुंभकर्ण ने रावण को बहुत समझया कि वह जो कर रहा है सब गलत है। लेकिन रावण ने उसकी कोई बात नहीं मानी और छोटे भाई होने के कारण कुंभकर्ण ने राम से युद्ध किया। तो आइये अब जानते हैं कुंभकर्ण के 6 महीने तक सोने का राज़।

कहा जाता है कि रावण अपने समय का सर्वाधिक विद्वान व्यक्ति था और उसके खानदान में एक से एक धुरंधर थे,इनमें से कुंभकर्ण एक ऐसा व्यक्तित्व था जिसकी कहानी सचमुच हैरान करने वाली है।कुंभकर्ण के बारे में ऐसा माना जाता है कि वह छह महीने सोता था। लेकिन सवाल यह है कि एक परम ज्ञानी महर्षि सोकर, प्रमादी होकर अपना जीवन क्यों बिताएगा? कई शोधकारों ने कुंभकर्ण की इस लंबी नींद का राज़ जानने की कोशिश की।उनके अनुसार कुंभकर्ण एक वैज्ञानिक था, जिसे अपने अत्याधुनिक व अकल्पनीय शोधों के लिए गोपनीय स्थान पर जाना पड़ता था। मान्यता है कि ये गोपनीय स्थान किष्किंधा के दक्षिण में किसी गुफा में था जहां पर उसने आश्चर्यजनक रूप से एक भारी-भरकम प्रयोगशाला स्थापित कर रखी थी। वह अधिकांश वक्त इसी स्थान पर अपने सहयोगियों के साथ गंभीर व उन्नत किस्म के प्रयोग करता था।

एक अन्य शोधकर्ता ये दावा भी करते हैं कि कुंभकर्ण की वैज्ञानिक प्रयोगशाला लैटिन अमेरिकी प्रदेश में थी, जहां जाने व लौटने के लिए वह स्वयं के बनाए अत्याधुनिक विमानों का इस्तेमाल करता था।शोधकारों ने ये भी दावा किया है कि रावण ने स्वचालित हथियार व दिव्यास्त्र सहित कई विमान भी कुंभकर्ण की सहायता से हासिल किए थे। रामायण में जिस पुष्पक विमान का जिक्र आता है, उसे भी रावण ने कुंभकर्ण से ही बनवाया था।कुंभकर्ण की वैज्ञानिक क्षमता अद्भुत थी तथा वह तत्कालीन विश्व का महानतम शोधकर्ता था।

 

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