जिस वृक्ष के निचे भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था वो वृक्ष आज भी है जाने !!!

 इस वृक्ष के निचे भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था!!!

आपने महाभारत की कथा तो सुनी ही होगी आपको बता दे की जब अर्जुन ने अपने सगे सम्बन्धियो पर धनुष उठाने से मना कर दिया तब भग्वान  कृष्ण ने अर्जुन को एक वट वृक्ष  के निचे गीता का ज्ञान दिया था।और उसे लड़ने के लिए तैयार किया था।आज हम आपसे उसी वृक्ष की बात कर रहे है जहा अर्जुन ने भगवान कृष्ण से गीता का ज्ञान लिया था ।

 इस वृक्ष के निचे भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था
इस वृक्ष के निचे भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था

अब आप कहगे की इतने सालो पुराना वृक्ष अब तक कैसे जिन्दा रह सकता है । जी हा आपको बतादे की जिस वृक्ष के निचे अर्जुन ने ज्ञान प्राप्त किया था वो वृक्ष आज भी सही सलामत है और जिन्दा है ।कुरुक्षेत्र से आठ किलो मीटर आगे पहबा रोड पर स्थित है ।और इस जगह का नाम ज्योति सर है ।कहते है की ज्योति सर वही जगह है जहा भगवान् कृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था इसी जगह पर श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता के 18 अध्याय का ज्ञान दिया था ।

वट वृक्ष
वट वृक्ष

यहाँ से उपदेश लेने के बाद ही अर्जुन युद्ध के लिए  तैयार हुआ था इस ज्योतिसर में एक बहुत  पुराना वट वृक्ष  है कहा जाता है की ये वृक्ष  हजारो साल पुराना है। ऐसा कहा जाता है की जब अर्जुन ने अपने भाई बन्धुओ के खिलाफ युद्ध करने से मना कर दिया तो श्री कृष्णा ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था ।और बो उपदेश इसी वट वृक्ष के निचे दिया था। ये वृक्ष आज वही उसी जगह पर सही सलामत स्थित है।

ये वट वृक्ष ही गीता का एक मात्र साक्षी है यहाँ आने वाले श्रदालु इसी वृक्ष के निचे अपना सिर झुकाते है। अब आपको बतादे की इस जगह का नाम ज्योतिसर क्यों पड़ा इस जगह पर एक बड़ा सरोवर है जिसे ज्योतिसर कहते है यदि ज्योतिसर का मतलब समझे तो इसका मतलब है ज्ञान का भंडार लेकिन कुछ लोग इसे ज्योतिसर महादेव भी  कहते है कहा जाता है की इस जगह पर  एक प्राचीन शिव मंदिर भी था।
ज्योतिसर का पवित्र  तीर्थ स्थल स्वरस्वती नदी के किनारे पर स्थित है। लेकिन अब ये नदी लुप्त हो चुकी है कहते है की आदि संकराचार्य भी यहाँ गीता के बारे में चिंता मनन के लिए आये  थे। ज्योतिसर के पास स्थित प्राचीन शिव मंदिर का निर्माण कश्मीर के राजा ने करवाया था ।
वट वृक्ष ज्योतिसर
वट वृक्ष ज्योतिसर