जानिए..!!क्यों खास होता है सावन का हर सोमवार..!!!

जानिए..!!क्यों खास होता है सावन का हर सोमवार..!!!

10 जुलाई से सावन का पावन महीना शुरू हो रहा है सावन के महीने में सोमवार का विशेष महत्व होता है। इसे भगवान शिव का दिन मानने के कारण शिव भक्त शिवालयों में जाकर शिव की विशेष पूजा अर्चना करते हैं। इस वर्ष सावन के महीने में 5सोमवार है। पहला सोमवार 10 जुलाई को है, दूसरा 17 जुलाई को, तीसरा 24 जुलाई को और चौथा 31 जुलाई को और आखरी है 7 अगस्त को। इन पांचों सोमवार का अपना विशेष महत्व है।आइये जानते है क्या क्या मह्त्व है सावन सोमवार के:

सावन का पहला सोमवारः बाधाओं से मुक्ति पाएं

सावन का पहला सोमवार बाधाओं को दूर करने वाला होता है। माना जाता है कि इस योग में भगवान शिव की पूजा करने से बाधाओं से मुक्ति मिलती है और योजनाओं को पूरा करने में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।

इस दिन अगर कोई काम शुरू करेंगे तो कार्य लंबे समय तक चलता रहेगा। इसलिए नया व्यवसाय और लंबी अवधि की योजनाओं को शुरू करने के लिए सावन का पहला सोमवार उत्तम है।

सावन का दूसरा सोमवारः शिव से पाएं स्वास्थ्य और बल

सावन का दूसरा सोमवार भी सर्वार्थ सिद्घ योग लेकर आ रहा है। इस कारण सावन का दूसरा सोमवार विशेष फलदायक बन गया है। इस दिन भगवान शिव की पूजा से बल एवं स्वास्थ्य की प्राप्ति का आशीर्वाद प्राप्त करें। इस सोमवार के दिन भगवान शिव को भांग, धतूरा एवं शहद अर्पित करना उत्तम फलदायी रहेगा।

सावन का तीसरा सोमवारः शिव मंत्र की सिद्घि करें

सावन का तीसरा सोमवार साध्य योग लेकर आ रहा है। इस योग को साधना और भक्ति के लिए उत्तम माना गया है। शिव भक्त इस दिन भगवान शिव के मंत्रों का जप करके मंत्र सिद्घि प्राप्त कर सकते हैं। माना जाता है कि साध्य योग में भगवान शिव की पूजा करने से कठिन कार्य भी आसानी से बन जाता है।

सर्वोत्तम है सावन का चौथा और पांचवा सोमवार

सावन का चौथा और पांचवा सोमवार बड़ा ही महत्व लेकर आता है । शास्त्रों के अनुसार इस दिन भक्ति पूर्वक शिव की पूजा करने से शत्रुओं पर विजय मिलती है। कार्य क्षेत्र एवं जीवन के दूसरे क्षेत्रों में आने वाली बाधाओं का निवारण होता है। जीवन पर आने वाले संकट टल जाते हैं। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से दांपत्य जीवन में आपसी प्रेम और सहयोग बढ़ता है। आर्थिक परेशानियों में कमी आती है तथा जीवन पर आने वाले संकट से भगवान शिव रक्षा करते हैं।

 

॥ जय महाकाल ॥