आप भी जरूर पढ़े..!!कांवड़ यात्रा का महत्व..!!!

आप भी जरूर पढ़े..!!कांवड़ यात्रा का महत्व..!!!

कांवड़ यात्रा
कांवड़ यात्रा

सावन के महीने में आपने कावड़ यात्रियों या कहें कावड़ियों को तो देखा ही होगा जो इस पवित्र महीने में कांवर के माध्यम से पवित्र नदियों का जल लाकर भगवान शिव को चढ़ाते हैं। शिव की पूजा में जलाभिषेक का विशेष महत्व है। ऐसा कहा जाता है कि कांवड़ियें कंधे पर कांवर उठाए गेरुआ वस्त्र पहनते हैं और नंगे पांव चलते हुए देवाधिदेव शिव को चढ़ाने के लिए पवित्र नदियों का जल लाते हैं। कांवर यात्रा में उम्र की कोई सीमा नहीं होती है। इसमें केवल

नजर आती है आस्था और विश्वास। बच्चे, युवा, अधेड़ व बूढ़े सभी रहते हैं कांवर यात्रा में।

क्यों करते हैं जलाभिषेक

ऐसी मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान निकले विष का पान भगवान शिव ने किया था। उन्होंने विष को अपने कंठ पर रोक लिया था। तत्पश्चात उनका शरीर जलने लगा। इसके बाद देवताओं ने उनके ऊपर जल चढ़ाया जिससे शिव जी का शरीर शीतल हो गया। इसलिए शिव जी को प्रसन्न करने

के लिए लोग जल चढाते है और इससे ही शुरू हुआ कांवर यात्रा का सिलसिला।

कठिन है कांवड़ यात्रा

देशभर में शिव भक्तों की कांवर यात्रा काफी बड़ी होती है। भक्त सावन में रिमझिम बारिश में भी मस्ती के साथ झूमते-गाते पावन नदियों के पास जाते हैं और जल लेकर नंगे पांव पैदल चलकर लौटते हैं। यात्रा के दौरान किसी प्रकार का व्यसन नहीं करते हैं और कांवर को किसी भी स्थिति में जमीन पर नहीं रखते हैं। अपने इष्टदेव के मंदिर पहुंचने पर कांवर से लाए गए जल को भगवान शिव को चढ़ाते हैं। सावन माह में भक्तों में उत्साह, भक्ति भाव के

साथ समर्पण और पवित्रता झलकती है। कहा जाता है कि यह सब शिव की शक्ति से ही संपन्न होता है।सब शिव की कृपा हैं ।

 

॥ जय महाकाल ॥