जानिये काशी विश्वनाथ मंदिर के बारे में ये रहस्यमय तथ्य !!!!

काशी विश्वनाथ मंदिर के बारे में ये रहस्यमय तथ्य !!!!

काशी विश्वनाथ शिवलिंग
काशी विश्वनाथ शिवलिंग

काशी विश्वनाथ मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह मंदिर पिछले कई हजारों वर्षों से वाराणसी में स्थित है। काशी विश्‍वनाथ मंदिर का हिंदू धर्म में एक विशिष्‍ट स्‍थान है। ऐसा माना जाता है कि एक बार इस मंदिर के दर्शन करने और पवित्र गंगा में स्‍नान कर लेने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस मंदिर में दर्शन करने के लिए आदि शंकराचार्य, सन्त एकनाथ रामकृष्ण परमहंस, स्‍वामी विवेकानंद, महर्षि दयानंद, गोस्‍वामी तुलसीदास सभी का आगमन हुआ हैं। यहिपर सन्त एकनाथजीने वारकरी सम्प्रदायका महान ग्रन्थ श्रीएकनाथी भागवत लिखकर पुरा किया और काशिनरेश तथा विद्वतजनोद्वारा उस ग्रन्थ कि हाथी पर से शोभायात्रा खुब धुमधामसे निकाली गयी।महाशिवरात्रि की मध्य रात्रि में प्रमुख मंदिरों से भव्य शोभा यात्रा ढोल नगाड़े इत्यादि के साथ बाबा विश्वनाथ जी के मंदिर तक जाती है।

ऐसी मान्यता है कि एक भक्त को भगवान शिव ने सपने में दर्शन देकर कहा था कि गंगा स्नान के बाद उसे दो शिवलिंग मिलेंगे और जब वो उन दोनों शिवलिंगों को जोड़कर उन्हें स्थापित करेगा तो शिव और शक्ति के दिव्य शिवलिंग की स्थापना होगी और तभी से भगवान शिव यहां मां पार्वती के साथ विराजमान हैं|

यह पूरा मंदिर रहस्यों से भरा हुआ है. इस मंदिर के दरवाजे में भी रहस्य छुपा हुआ है. आज हम आपको काशी के रहस्यों से परिचित कराते है-

  • इस मंदिर के चार प्रमुख द्वार है शांति द्वार, कला द्वार, प्रतिष्ठा द्वार, निवृत्ति द्वार. इन सभी दरवा का आध्यात्मिक महत्‍व भी है. दक्षिणी गेट को ‘अघोर मुख’ कहते हैं. ऐसा कहा जाता है कि इस द्वारसे भगवान शि‍व का प्रवेश होता है.
  • माँ अन्नपूर्णा से बाबा ने भिक्षा लेकर वरदान लिया था कि काशी से कोई भी कभी भी भूखा नहीं जायेगा ।  इस मंदिर में लोगों को मृत्यु के बाद तारक मंत्र देकर पुनर्जन्म से मुक्त कराया जाता है ।
  • इस मंदिर के दर्शन मात्र से ही पाप खत्म हो जाते है. इस मंदिर का मुख्यद्वार चांदी का बना हुआ है । ऐसा माना जाता है कि अगर परिसर में एक भी बूंद जल हाथों से गिर जाए तो बाबा प्रसन्न होते है ।
  • मंदिर परिसर में अविमुक्तेश्वर महादेव तीन पीठ पर बैठे है. अविमुक्तेश्वर महादेव के दर्शन बाबा के गुरु के रूप में किया जाता है ।
  • बाबा का ज्योतिर्लिंग ईशान कोण में है ।  इसका मतलब यह परिसर विद्या, गुण और हर कला से भरा हुआ है ।विश्वनाथ काशीजी गुरु और राजा के रूप में विराजमान है ।  गुरु रूप में काशीजी पुरे मंदिर में भ्रमण करते रहते है. रात्रि 9 बजे काशीजी का श्रृंगार किया जाता है ।
  • मंदिर के गुबंद में भी श्री यंत्र लगा हुआ है. मंत्र साधना के लिए साधकों का यह प्रमुख स्थान है ।
  • इस मंदिर में बाबा का पूरा श्रृंगार पश्चिम दिशा की ओर किया जाता है. श्रृंगार के समय सारी मूर्तियो का मुख पश्चिम दिशा की ओर रहता है।