आज पढ़िए..!!अद्भुत झील जहाँ अरबो का खजाना गड़ा हुआ है…!!!

आज पढ़िए..!!अद्भुत झील जहाँ अरबो का खजाना गड़ा हुआ है…!!!

कमरुनाग झील
कमरुनाग झील

हिमाचल को देव भूमि कहा जाता है आज हम हिमाचल में स्थित एक ऐसी झील के बारे में बता रहे है,जिसके बारे में कहा जाता है की उसमे गड़ा हुआ है अरबों का खजाना। लेकिन अगर आपके दिमाग में यह सोच रहे हैं कि इस खजाने को चुरा लेंगे या किसी तरह हथिया लेंगे तो यह बात मन से निकाल दीजिए।क्योंकि यह खजाना उस झील में है जिसके विषय में यह कहा जाता है कि झील का अंत सीधा पाताल में जाकर होता है और तो और इस झील के खजाने की रक्षा नाग देवता करते हैं क्योंकि खजाना देवताओं का है।इस झील का नाम है कमरुनाग झील।

हर साल 14 और 15 जून को बाबा कामरू नाग का दर्शन भक्तों को प्राप्त होता है। इनके दर्शन के लिए लोग रोहांडा नामक स्थान से 8 किलोमीटर घने जंगल और पहाड़ों की कठिन चढ़ाई पूरी करके आते हैं। रोहांडा हिमाचल प्रदेश के मण्डी नामक स्थान से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर है।कामरू नाग झील के विषय में मान्यता है कि इसमें सोना, चांदी गहना और धन कुछ भी अर्पित करने से मनोकामना पूरी होती है। इसलिए लोगों को गहने और धन चढ़ते हुए यहां देखा जा सकता है। लोगों की यह भेंट सीधे देवताओं तक पहुंच जाती है। वर्षों से लोगों द्वारा चढ़ाए गए धन और गहने झील की गर्त में यानी देवताओं के खजाने में रखे हुए हैं। सदियों से चली आ रही इस परम्परा के आधार पर यह माना जाता है कि इस झील के गर्त में अरबों का खजाना दबा पड़ा है।

कामरू नाग जी का जिक्र महाभारत में भी आता है। ये धरती के सबसे शक्तिशाली योधा थे। लेकिन कृष्ण नीति से हार गए। कृष्ण जी ने एक शर्त लगा कर इन्हे हरा दिया और बदले में इनका सिर मांग लिया। लेकिन कमरुनाग जी ने एक खवाइश जाहिर की कि वे महाभारत का युद्ध देखेंगे। इसलिए भगवान् कृष्ण ने इनके काटे हुए सिर को हिमालय के एक उंचे शिखर पर पहुंचा दिया।लेकिन जिस तर्फ इनका सिर घूमता वह सेना जीत की ओर बढ्ने लगती। तब भगवान कृष्ण जी ने सिर को एक पत्थर से बाँध कर इन्हे पांडवों की तरफ घुमा दिया। इन्हें पानी की दिक्कत न हो इसलिए भीम ने यहाँ अपनी हथेली को गाड कर एक झील बना दी।यह कमरुनाग झील वही झील है।

 

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