कौन है वो जिनके दर्शन के बिना महाकाल के दर्शन भी अधूरे है ……

 

उज्जैन नगर स्थित काल भैरव के मंदिर में ना सिर्फ मदिरा का भोग लगाया जाता है बल्कि  जब भी किसी भक्त को मुकदमे में विजय हासिल होती है तो बाबा के दरबार में आकर मावे के लड्डू का प्रसाद चढ़ाते हैं तो वहीं जिन भक्तों की सूनी गोद भर जाती है वो यहां बाबा को बेसन के लड्डू और चूरमे का भोग लगाते हैं. प्रसाद चाहे कोई भी क्यों न हो बाबा के दरबार में आने वाले हर भक्त सवाली होता है और बाबा काल भैरव अपने आशीर्वाद से उसके कष्टों को हरने वाले देवता.

बाबा काल भैरव के इस धाम एक और बड़ी दिलचस्प चीज है जो भक्तों का ध्यान बरबस अपनी ओर खींचती है और वो है मंदिर परिसर में मौजूद ये दीप स्तम्भ इन दीपस्तंभ पर भक्त अपनी मनोकामना के अनुसार दीप जलाते है शत्रु बाधा से मुक्ति व अच्छे स्वास्थय के लिए सरसों के तेल और मान प्रतिष्ठा में वृद्धि के लिए चमेली के तेल का दिया जलाते है |

कालभैरव के इस मंदिर में दिन में दो बार आरती होती है एक सुबह साढ़े आठ बजे आरती की जाती है तथा दूसरी आरती रात में साढ़े आठ बजे होती है काल भैरव को महाकाल का सेनापति भी कहा जाता है सिंधिया राजघराने को काल भैरव की कृपा से युद्धों में मिली विजय के कारण मराठा सरदारों की पगड़ी भगवान् काल भैरव के मस्तक पर पहनाई जाती है रविवार की पूजा का यहां विशेष महत्व होता है.

शहर से आठ किलोमीटर दूर कालभैरव के इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि अगर कोई उज्जैन आकर महाकाल के दर्शन करे और कालभैरव न आए तो उसे महाकाल के दर्शन का आधा लाभ ही मिलता है धार्मिक मान्यता के अनुसार कालभैरव को ये वरदान है कि भगवान शिव की पूजा से पहले उनकी पूजा होगी. कालभैरव को ग्रहों की बाधाएं दूर करने के लिए जाना जाता है ख़ास तौर पर राहू ग्रेह के कष्टों से मुक्ति के लिए इसलिए काल भैरव की आराधना की जाती है