आज जानिए महिला नागा साधुओं के बारे में..!!!क्या है उनसे जुड़े तथ्य..!!!

आज जानिए महिला नागा साधुओं के बारे में..!!!क्या है उनसे जुड़े तथ्य..!!!

महिला नागा साधुओं से जुड़े कुछ रोचक तथ्य
महिला नागा साधुओं से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

भारत को साधु संतो की भूमि कहा जाता है ,भारत में साधु-संत बनने की परंपरा आदि काल से चली आ रही है। ऐसे ही आपने नागा साधुओं की रहस्यमय दुनिया के बारे में जरूर सुना होगा । आज हम आपको महिला नागा साधुओं से जुड़े कुछ रोचक तथ्य बताएँगे।सबसे ज्यादा नागा साध्वियां जूना अखाड़े में हैं। इनमें भी सबसे ज्यादा साध्वियां नेपाल से हैं, जहां सनातन हिंदू धर्म के लिए लोगों में विशेष अनुराग देखने को मिलता है। इतना ही नहीं, जूना अखाड़े की नागा साध्वियों में यूरोपियन देशों की महिलाएं भी हैं जो सनातन धर्म की प्राचीन परंपराओं से प्रभावित होकर साध्वी बन चुकी हैं।

पुरुष नागा साधू और महिला नागा साधू में फर्क केवल इतना ही है की महिला नागा साधू को एक पिला वस्त्र लपेट कर रखना पड़ता है और यही वस्त्र पहन कर स्नान करना पड़ता है।नग्न स्नान की अनुमति नहीं है, यहाँ तक की कुम्भ मेले में भी नहीं।

पुरुष नागा साधुओं की तरह ही महिला साधुओं के लिए भी अखाड़े में कुछ नियम बनाए गए हैं, जिनका पालन करना होता है। यह नियम भी पुरुषों के जितने कठोर है।

  1. सन्यासिन बनने से पहले महिला को 6 से 12 साल तक कठिन बृह्मचर्य का पालन करना होता है,इस दौरान महिलाओं को भूमि पर शयन, दान या भिक्षा में मिला सात्विक भोजन ग्रहण करना, संभोग या यौनाचार से दूर रहना, सनातन धार्मिक ज्ञान अर्जित करना, प्राणायाम और योग करना होता है। इसके बाद जब गुरु इनके ब्रह्मचर्य के पालन से संतुष्ट होते हैं तब इन्हें नागा साध्वी के रूप में दीक्षा दी जाती है।
  2. पुरुष नागा साधुओं की तरह नागा साध्‍िवयों को भी अखाड़ों में पूरा सम्मान मिलता है। अखाड़ों में इन्हें माता कहकर पुकारा जाता है। फिर चाहे वह उम्र में कितनी ही छोटी क्यों न हों।
  3. महिला नागा सन्यासिन बनाने से पहले अखाड़े के साधु-संत महिला के घर परिवार और पिछले जीवन की जांच-पड़ताल करते है।
  4. महिला को भी नागा सन्यासिन बनने से पहले खुद का पिंडदान और तर्पण करना पड़ता है।
  5. जिस अखाड़े से महिला सन्यास की दीक्षा लेना चाहती है, उसके आचार्य महामंडलेष्वर ही उसे दीक्षा देते है।
  6. महिला को नागा सन्यासिन बनाने से पहले उसका मुंडन किया जाता है और नदी में स्नान करवाते है।
  7. महिला नागा सन्यासिन पूरा दिन भगवान का जप करती है।सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठना होता है,इसके बाद नित्य कर्मो के बाद शिवजी का जप करती है दोपहर में भोजन करती है और फिर से शिवजी का जप करती है।शाम को दत्तात्रेय भगवान की पूजा करती है और इसके बाद शयन।
  8. सिंहस्थ और कुम्भ में नागा साधुओं के साथ ही महिला सन्यासिन भी शाही स्नान करती है।अखाड़े में सन्यासिन को भी पूरा सम्मान दिया जाता है।
  9. जब महिला नागा सन्यासिन बन जाती है तो अखाड़े के सभी साधु-संत इन्हे माता कहकर सम्बोधित करते है।
  10. महिला नागा सन्यासिन माथे पर तिलक और सिर्फ एक चोला धारण करती है।आमतौर पर ये चोला भगवा रंग का या सफेद होता है।
  11. सन्यासिन बनने से पहले महिला को ये साबित करना होता है कि उसका परिवार और समाज से कोई मोह नहीं है।वह सिर्फ भगवान की भक्ति करना चाहती है।इस बात की संतुष्टि होने के बाद ही दीक्षा देते है।