जानिये क्यों जल में ही किया जाता है प्रतिमाओं का विसर्जन ……

हम नवरात्री में या गणपति उत्सव के दौरान सुंदर-सुंदर प्रतिमा घर लाते है और इनकी पूजा भी करते है लेकिन अगले ही दिन किसी नदी या तालाब में ले जाकर विसर्जित कर देते है ।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को जल में ही क्यों विसर्जित कर दिया जाता है। इस प्रश्न का उत्तर शास्त्रों में निहित है ,शास्त्रों के अनुसार जल ब्रह्म का स्वरुप माना गया है। क्योंकि सृष्टि के आरंभ में और अंत में संपूर्ण सृष्टि में सिर्फ जल ही जल होता है।

जल बुद्घि और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। इसके देवता गणपति को माना गया है। जल में ही श्रीहरि का निवास है इसलिए वह नारायण भी कहलते हैं।

माना जाता है कि जब जल में देव प्रतिमाओं को विसर्जित किया जाता है तो देवी देवताओं का अंश मूर्ति से निकलकर वापस अपने लोक को चला जाता है यानी परम ब्रह्म में लीन हो जाता है। यही कारण है कि मूर्तियों और निर्माल को जल में विसर्जित किया जाता है।