चैत्र नवरात्र: भूलकर भी जाप करते समय न करें ये गलतियां!!!नहीं तो हो जाएँगी माँ दुर्गा नाराज!!!

भूलकर भी जाप करते समय न करें ये गलतियां!!!

अगर आपको किसी भी देवी या देवता को प्रसन्न करना है तो आपके श्रृद्धानुसार जाप करने से वो जल्द ही प्रसन्न हो जाते है, लेकिन क्या आप जानते है कि जप-तप करने में जरा सी गलती आपके पूरें पुण्य कर्मो में पानी फेर देती है। इसलिए इनकी पूजा करने के लिए विधि-विधान बहुत ही जरूरी है। विधि-विधान से किया हुआ जप से जल्द ही आपको फल भी मिलता है।मां दुर्गा की आराधना का पर्व चैत्र नवरात्र शुक्ल पक्ष के नवरात्रों का आरंभ वर्ष 28 मार्च 2017 के दिन से होगा। इसी दिन से हिंदु नवसंवत्सर का आरंभ भी होता है। इस बार चैत्र नवरात्र 28 मार्च, मंगलवार से शुरु होकर 5 अप्रैल, बुधवार को रामनवमी के साथ समाप्त होगे।

पुराणों में इसके बारें में बहुत ही गहराई से बताया गया है। जिसका पालन कर आप अपने घर में खुशहाली, धन-समृद्धि ला सकते है। जानिए पुराणों में ऐसे कौन से बातें बताई गई है जिनको जप करते समय कभी भी भूलना नही चाहिए।

खांसी
किसी भी देवी-देवताओं को प्रसन्न करना  कोई मुश्किल काम नही है। इन्हें जप-तप से आसानी से प्रसन्न किया जा सकता है, लेकिन आपकी एक गलती आपको मुश्किल में डाल सकती है। इसलिए जब भी आप मां का जाप करें, तो इस बात का ध्यान रखें कि इस समय आपको खांसी या छींक न आए। इससे आप अपवित्र हो जाएगे। अगर आपके साथ ऐसा होता है तो तुरंत जाकर हाथ-पैर धुल कर जाप करें तभी आप दोबारा जाप करें।

उबासी न लें
आलस्य की एक निशानी उबासी भी है। जब आप नींद से जगें हो तब आपको उबासी या जंभाई आती है। इसलिए पूजा करते समय यह काम करना वार्जित है। इसीलिए हिंदू पुराणों में कहा गया है कि पूजा-अर्चना का काम सुबह जल्दी उठकर, स्नान करके कर लेना चाहिए। जिससे आपका आलस्य आपसे दूर रहे और आप शांत मन से पूजा कर सकें।

गंदगी फैलाना
अगर आपको पूजा करते समय कोई ऐसे काम करने पड़े तो दुबारा स्नान कर पूजा करना चाहिए। कहा जाता है कि जहां पर दरिद्रता होती है वहां पर किसी भी देवी-देवता का वास नही होता है। इसलिए हमेशा स्वच्छ होकर पूजा-अर्चना करनी चाहिए। इससे आपको घर में लक्ष्मी हमेशा वास करेगी साथ ही आपके घर में धन-समृद्धि बढ़ेगी।

जप के बाद दक्षिणा का न देना
देव पूजा और आराधना में पूजन करने के साथ-साथ दान देने का भी बहुत महत्व माना जाता है। पुराण के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति पूरे विधि-विधान के साथ भगवान का जप करे और उसके बाद दक्षिणा या दान न करे तो उसका जप व्यर्थ चला जाता है।