आज जानिये कैसे करे आपके ईष्टदेव का चुनाव !!

आज जानिये कैसे करे आपके ईष्टदेव का चुनाव !!

आज हम आपको ज्योतिष शास्त्र के माध्यम से बताएंगे कि इष्ट देवता का चुनाव कैसे किया जाता है आइए पहले जानते हैं इष्ट देवता के बारे में कुछ बातें।परिवार के बच्चों को इष्ट देवता शब्द सर्वप्रथम परिवार के बड़े बूढ़ों से सुनने को मिलता है । जैसे जैसे बच्चे बड़े होते चले जाते हैं समस्या है उन्हें घेरने लगती है । तब वह इस शब्द की जांच पड़ताल करने निकलते हैं। इष्ट का अर्थ होता है जो हमें बहुत प्यारा हो जो हमारी इच्छा के बिल्कुल अनुरूप हो । हम जिन गुणों को अच्छा मानते हैं वह सब उनमें हो । और देवता का अर्थ होता है जो देता है बिना किसी प्रकार के शुल्क के आपको वह सब देता है । जो आपको जीवन यापन के लिए चाहिए भारत हो या विश्व अलग-अलग जाति समुदाय के देवता होते हैं। जिन्हें इच्छा पूर्ति करने वाला जानकर उसकी पूजा आराधना अपने-अपने ढंग से की जाती है।

साधारण शब्दों में समझे तो मनुष्य की इच्छा पूर्ति के सर्वोत्तम साधन को इष्ट देवता के नाम से जाना जाता है । इन्ही इच्छा पूर्ति के साधन को और सरल रूप देते हुए हम आपको बताएंगे कि ज्योतिष की सहायता से इष्ट देवता का चुनाव कैसे करें।

इष्ट देवता को जानने के लिए आपको आपकी जन्म कुंडली की आवश्यकता पड़ेगी ।अब जन्म कुंडली में ध्यान से देखें जिस स्थान पर ग्रहों के अंश दिए होते हैं वहां सबसे अधिक अंश किस ग्रह को प्राप्त है। जन्म कुंडली में सबसे अधिक अनुसूचित ग्रह को प्राप्त होंगे वह ग्रह आपकी जन्मकुंडली का आत्मकारक ग्रह कहलाएगा। यह ग्रह आपके जीवन में बहुत मुख्य भूमिका निभाता है ।और इसी ग्रह से हमें इस बात का ज्ञान प्राप्त होता है कि हमारे इष्ट देवता कौन है। आत्म कारक ग्रह का ज्ञान होने के पश्चात हमारे द्वारा दी गई तालिका से आपको यह पता चल जाएगा कि आपके इष्ट देव कौन है।

1 अगर आपके आत्म कारक ग्रह सूर्य है तो भगवान विष्णु और उनके रामअवतार आपके इष्ट देवता हैं।

2 अगर आपकी आत्म कारक ग्रह चंद्रमा है तो भगवान शिव माता पार्वती और कृष्ण जी आपके इष्ट देवता है।

3 अगर आपके आत्म कारक ग्रह मंगल है तो हनुमान जी, कार्तिकेय जी, नरसिंह भगवान आपके इष्ट देवता है।

4 अगर आपके आत्म कारक ग्रह बुध है तो श्री गणेश और दुर्गा जी आपके इष्ट देवता है।

5 अगर आपकी आत्मा कार्यक्रम ग्रह  बृहस्पति है तो भगवान विष्णु और उनके वामन अवतार आपके इष्ट देवता है।

6 अगर आपकी आत्म कारक ग्रह शुक्र है तो माता लक्ष्मी और परशुराम अवतार आपके इष्ट देवता है

7 अगर आपके हाथ में कार्यक्रम ग्रहण शनि है तो भैरव, याम और कुर्मा अवतार और हनुमान जी आपके इष्ट देवता है।

8 अगर आपके हाथ में कारक ग्रह है राहु है तो माता सरस्वती और शेषनाग आपके इष्ट देवता है।

9 अगर आप की आत्म कारक ग्रह के हेतु हेतु श्री गणेश और मत्स्य अवतार आपके इष्ट देवता है।

ईश्वर एक है पत्थर पूजो पेड़ पूजो या पूजो कोई पुस्तक आपकी पूजा में जो विश्वास व भक्ति होती है। वह उसी परमेश्वर तक जाती है । उसमें कितने रूप आपकी सुविधा के लिए धरे है। जिस रूप को मानकर आप उसकी शरण में जाओगे आपको वह स्वीकार करेगा। बस एक बात का ध्यान रहे किसी के धर्म और मार्गों को गलत नहीं बोलना चाहिए।

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