जानिए इस एक गलती कि वजह से नहीं मिलता है आपको हनुमान चालीसा पाठ का लाभ!! आज ही सुधारें अपनी गलती को !!

जानिए इस एक गलती कि वजह से नहीं मिलता है आपको हनुमान चालीसा पाठ का लाभ!! आज ही सुधारें अपनी गलती को !!

सभी सादर गण हनुमान चालीसा को भली-भांति जानते भी है और मानते भी है उनमें से भी लगभग 10% साधक प्रतिदिन इसका पाठ भी करते हैं। लेकिन अगर उनसे पूछा जाए कि उन्हें हनुमान चालीसा का कोई नहीं मिला है या नहीं मिला है सभी बोलते हैं कि हमें हर समस्या का हल मिल रहा है लेकिन उन्हें हर समस्या घेरे हुए होती है।
ऐसा क्यों होता है? क्या हनुमानजी कमजोर देवता है ?या वह हमारी पूजा को सुनते नहीं है ?क्या हनुमान चालीसा कुछ प्रभाव नहीं है जो इतने दिन हो गए पाठ को करते हुए और लाभ कुछ हुआ नहीं?
तो आइए जानते हैं कि कब और कैसे करें हनुमान चालीसा का पाठ जिससे कि भगवान हनुमान जी की पूर्ण कृपा हम प्राप्त कर सकें।

हनुमान चालीसा के लिए आवश्यक नियम

जब भी हम हनुमान चालीसा का पाठ करें नीचे दिए गए नियमों का पालन करना अति आवश्यक है अन्यथा हमें हनुमान चालीसा का फल प्राप्त नहीं होता है।

1. भक्त कैसे भी कपड़े पहन सकता है लेकिन कपड़े धोने हुए होना चाहिए और भक्त को अच्छी तरह से नहा लेना चाहिए।

2 . आसन जिस पर बैठकर पाठ करना है वह आसन लाल रंग का ही होना चाहिए और वह भी होना ऊनी चाहिए।

3 प्रसाद चाहे कुछ भी हो गुड और चने हो या बुंदिया चूरमा हो लेकिन तुलसी के पत्ते जरूर होना चाहिए प्रसाद में।

4 हनुमान जी के श्रृंगार के लिए सिंदूर चमेली का तेल और एक जगह का होना अति आवश्यक है।

अब ऐसे करें हनुमान चालीसा का पाठ

1.सबसे पहले आप नहा धोकर स्वच्छ कपड़े पहनकर हनुमान जी को स्नान करा दीजिए ध्यान रखिए गंगा जल का प्रयोग करना है।

2.ध्यान रहे मनमानी और शरीर से ब्रह्मचर्य का पालन करना है अनुष्ठान के दौरान।

3 यह पाठक शनिवार या मंगलवार को प्रारंभ कर सकते हैं या तो लगातार 40 दिनों का अनुसरण कीजिए या फिर हर शनिवार और मंगलवार को अगले 11 शनिवार और अगले मंगलवार तक एक दिन में 21 पाठ करने हैं पाठ केवल सुबह ही करना है सुबह 4:00 बजे पाठ प्रारंभ हो जाने चाहिए।

4 जब आप अनुष्ठान कर रहे हो तब हनुमान जी की प्रतिमा पर चमेली के तेल और सिंदूर से श्रृंगार करना चाहिए और उन्हें जनेऊ पहनना चाहिए साथ ही चमेली के तेल का दीपक जलाकर तुलसी के पत्ते युक्त प्रसाद को वहां रख कर उन्हें भोग लगाना चाहिए।

5 जब आप हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे हो जब तक एक लोटा गंगाजल का पूजा स्थल पर जरुर रखना है और शुद्ध प्राकृतिक धूपबत्ती अगरबत्ती का प्रयोग ही करना है।

6 आप सबसे पहले गणेश जी का और फिर गुरु का स्मरण करें और प्रणाम करें तब अपने कुलदेवी और कुलदेवता को याद करें और पारिवारिक देवता यानी पितृ देवता को स्मरण करें और उनको प्रणाम करें।

7 अब आपको श्री राम जी को याद करना है और उनकी नीचे दी गई पंक्ति का साथ या अधिक बार जप करना है।
पंक्तियां है- जय सियाराम जय जय सियाराम

8 अब हनुमान जी का स्मरण करके हनुमान चालीसा का पाठ प्रारंभ करना है।

अगर आप इस ढंग से हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे मनोवांछित फल आपको प्रदान होगा पाठ के बाद प्रसाद को बाँट दीजिए और गाय और बंदर को  जरुर खिलाईयेगा। जब आपकी चालीसा फूल हो जाए तो जैसा पाठ किया है जब के दौरान उसी तरह हवन भी कीजिए हर चौपाई के बाद एक आहुति देनी होगी और हवन के बाद आपको भूखों मैेे चूरमा बूंदी का प्रसाद दे बांटना होगा इसी तरह आपका अनुष्ठान सफलतापूर्वक संपन्न होगा।

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