जरूर पढ़िए..!!घर की नींव रखने पर किन बातों का ध्यान रखना चाहिए…!!!

जरूर पढ़िए..!!घर की नींव रखने पर किन बातों का ध्यान रखना चाहिए…!!!

घर तो सबके लिए बहुत ही अनमोल होता है लेकिन क्या आप जानते है घर की नींव और ज्यादा महवपूर्ण होती है और घर की नींव रखते वक़्त इसमें वास्तु नियमों का ध्यान रखने से शुभ और सौभाग्य की प्राप्ति की जा सकती है।

आज हम आपको बता रहे है क्या क्या बातें ध्यान में रखना चाहिए घर की नींव रखते वक़्त।

  • श्रीमद भागवत महापुराण के पांचवें स्कंद में लिखा है कि पृथ्वी के नीचे पाताललोक है और इसके स्वामी शेषनाग है, इसलिए कभी भी, किसी भी स्थान पर नींव पूजन/ भूमि पूजन करते समय चांदी के नाग का जोड़ा रखा जाता है।
  • यह पूजन किसी शुभ दिन या फिर रवि पुष्य योग को ही कराना चाहिए।
  • गृहारंभ हेतु स्थिर या द्विस्वभाव राशि का बलवान लग्न लेना चाहिए।
  • जिस भूमि में गड्ढा खोदने पर राख, कोयला, भस्म, हड्डी, भूसा आदि निकले, उस भूमि पर घर बनाकर रहने से रोग होते हैं तथा दु:ख की प्राप्ति होती है।
  • वैशाख, श्रावण, कार्तिक, मार्गशीर्ष और फाल्गुन इन चंद्रमासों में गृहारंभ शुभ होता है। इनके अलावा अन्य चंद्रमास अशुभ होने के कारण निषिद्ध कहे गए हैं।

  • वैशाख में गृहारंभ करने से धन धान्य, पुत्र तथा आरोग्य की प्राप्ति होती है।
  • श्रावण में गृहारंभ करने से धन, पशु और मित्रों की वृद्धि होती है।
  • कार्तिक में गृहारंभ करने से सर्वसुख की प्राप्ति होती है।
  • फाल्गुन में गृहारंभ करने से धन तथा सुख की प्राप्ति और वंश वृद्धि होती है।
  • उक्त सभी मासों में मलमास का त्याग करना चाहिए।
  • भवन निर्माण कार्य शुरू करने के पहले अपने आदरणीय विद्वान पंडित से शुभ मुहूर्त निकलवा लेना चाहिए। भवन निर्माण में शिलान्यास के समय ध्रुव तारे का स्मरण करके नींव रखें। संध्या काल और मध्य रात्रि में नींव न रखें।
  • भूमि पूजन के बाद नींव की खुदाई ईशान कोण से ही प्रारंभ करें। ईशान के बाद आग्नेय कोण की खुदाई करें। आग्नेय के बाद वायव्य कोण, वायव्य कोण के बाद नैऋ त्य कोण की खुदाई करें। कोणों की खुदाई के बाद दिशा की खुदाई करें। पूर्व, उत्तर, पश्चिम और दक्षिण में क्रम से खुदाई करें।
  • नींव पूजन में तांबे का कलश स्थापित किया जाना चाहिए। कलश के अंदर चांदी के सर्प का जोड़ा, लोहे की चार कील, हल्दी की पांच गांठें, पान के 11 पत्ते, तुलसी की 35 पत्तियां, मिट्टी के 11 दीपक, छोटे आकार के पांच औजार, सिक्के, आटे की पंजीरी, फल, नारियल, गुड़, पांच चौकोर पत्थर, शहद, जनेऊ, राम-नाम पुस्तिका, पंच रत्न, पंच धातु रखना चाहिए। समस्त सामग्री को कलश में रखकर कलश का मुख लाल कपड़े से बांधकर नींव में स्थापित करना चाहिए।

  • घर की नींव रखना के लिए जल का तांबे का पात्र, चावल, हल्दी, सरसों, चांदी का नाग-नागिन का जोड़ा, अष्टधातु कश्यप, 5 कौड़ियां, 5 सुपारी, सिंदूर, नारियल, लाल वस्त्र, घास, रेजगारी, बताशे, पंच रत्न, पांच नई ईंटें आदि।

किसी भी प्रकार के भवन निर्माण में वास्तु शास्त्र का बड़ा ही महत्व होता है। यदि वास्तु के नियम का पालन किया जाए तो जीवन सुखमय हो जाता है। सुख, शांति समृद्धि के लिए निर्माण के पूर्व वास्तुदेव का पूजन करना चाहिए एवं निर्माण के पश्चात गृह-प्रवेश के शुभ अवसर पर वास्तु-शांति, होम इत्यादि किसी योग्य और अनुभवी ब्राह्मण, गुरु अथवा पुरोहित के द्वारा अवश्य करवाना चाहिए।

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