घर के मंदिर में नही करना चाहियें यह एक गलती होता है घर बर्बाद !!

घर के मंदिर में नही करना चाहियें यह एक गलती होता है घर बर्बाद !!

हिंदू धर्म में म्रत पूर्वजों को पित्र माना जाता है। और पित्र को पूजनीय। यही कारण है कि पितरों की पुण्यतिथि पर उनकी आत्मा कि शांति के लिए विभिन्न तरह का दान करने की परंपरा है। मगर घर के मंदिर में मृत लोगों की तस्वीर लगाना शुभ नहीं माना गया है । साथ ही भगवान और पित्र की साथ में पूजा भी नहीं करना चाहिए। इसे घर में कई तरह के दोष होने की आशंका बढ़ जाती है इस से बचने के लिए हमेशा अपने पितरों की तस्वीरों को घर के मंदिर से अलग ही रखें।

इसकी पीछे कारण सकारात्मक- नकारात्मक उर्जा और अध्यात्म में हमारी एकाग्रता का है। दरअसल मृत आत्मा से हम भावनात्मक रुप से जुड़े होते हैं। उनके चले जाने से हमें खालीपन का एहसास होता है। मंदिर में उनकी तस्वीर होने से हमारी एकाग्रता भंग हो जाती है ।  पूजा के समय संभव है कि हमारा सारा ध्यान उन मृत तस्वीर की ओर हो। इस बात का घर में वातावरण पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

हम पूजा में बैठते समय पूरे एकाग्रता लाने की कोशिश करते हैं ताकि पूजा का गीत प्रभाव ऐसे में बताना ओके और ध्यान जाने से हम फुल दुखद घड़ी में खो जाते हैं जिसमें हमने अपने प्रियजनों को खोया था। हमारी मना स्थिति नकारात्मक भाव से भर जाती। ऐसे घर में भगवान  और म्रत लोगों की तस्वीर कभी भी एक साथ नहीं लगाना चाहिए।

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