उज्जैन का एक ऐसा पितृ मोक्ष स्थान, जिसको स्वयं श्री कृष्ण ने पितरो के मोक्ष निमित बनाया..!!

उज्जैन का एक ऐसा पितृ मोक्ष स्थान:गयाकोटा
उज्जैन का एक ऐसा पितृ मोक्ष स्थान:गयाकोटा

आज जिस स्थान के बारे में हम बताने जा रहें है वह स्थान स्वयं श्री कृष्ण ने पितरो के मोक्ष निमित बनाया था। हम बात कर रहें है उज्जैन स्थित गयाकोटा स्थान की।पौराणिक एवं धार्मिक नगरी उज्जैन में स्थित गयाकोटा का अलग ही महत्व है क्योकि इसका सीधा सम्बन्ध श्री कृष्ण से है। गयाकोटा जैसा कि नाम से स्पष्ट है,गया कोठा में अपने पितरों की मुक्ति की कामना के लिए लोग प्रार्थना करते हैं। इसके पीछे एक कथा है कि भगवान श्रीकृष्ण और बलराम ने उज्जैन में गुरु सांदीपनि से शिक्षा ग्रहण की थी। स्कंद पुराण के अवंतिका खंड के अनुसार शिक्षा प्राप्त करने के बाद जब श्रीकृष्ण ने गुरु सांदीपनि से

कहा कि आपको गुरु दक्षिणा में क्या दे सकता हूं तब गुरु माता अरुंधति ने श्रीकृष्ण से कहा था कि उनके 7 गुरु भाइयों को गजाधर नामक राक्षस अपने साथ ले गया है। वे उन सभी को लेकर आए। तब श्रीकृष्ण ने कहा कि छह भाइयों का गजाधर वध कर चुका है। एक अन्य गुरु भाई को उसने पाताल लोक में छुपाकर रखा है। वे उसे ला सकते हैं। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने गजाधर का वध किया था और उक्त गुरु भाई को उनके पास लाकर सुपुर्द किया था। तब गुरु माता ने 6 गुरु भाइयों के मोक्ष का सरल उपाय बताने को कहा था।

उनका कहना था कि गुरु सांदीपनि नदी पार नहीं कर सकते। तब श्रीकृष्ण ने बिहार के गया में स्थित फल्गु नदी को गुप्त रूप से उज्जैन में प्रकट किया था। यह अंकपात मार्ग स्थित सांदीपनि आश्रम के पास स्थित है। यह स्थान ‘गयाकोटा’ कहलाता है।गयाकोटा तीर्थ पर भगवान श्री विष्णु के सहस्त्र चरण विद्यमान हैं। जिन पर दुग्धाभिषेक कर यहां आने वाले अपने पितरों की मुक्ति और मनोवांछित फल प्राप्त करते हैं। गयाकोटा मंदिर में पितरों

की शांति के निमित्त भगवान श्री विष्णु के सहस्त्र चरण कमलों में दूध और जल चढ़ाने से अधिक पुण्यलाभ मिलता है और इसका श्राद्ध पक्ष में और भी महत्व बढ़ जाता है ।

 

 

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