जानिए कैसे बने बप्पा गणपति से “गणपति बप्पा मोरिया”..!!

जानिए कैसे बने बप्पा गणपति से “गणपति बप्पा मोरिया”..!!

पंद्रवी शताब्दी के संत हुए मोरया गोसावी
पंद्रवी शताब्दी के संत हुए मोरया गोसावी

गणेश उत्सव का आग़ाज़ हो चूका है। गणपति की अराधना में उनके हर भक्त की जुबान से ‘गणपति बप्पा मोरया, मंगलमूर्ति मोरया’, यही जयकारा सुनने को मिलता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कहां से हुइ इस जयकारे की उत्पत्ति ? क्या है इसके पीछे की कहानी। ये रोचक कहानी है एक भक्त और भगवान की ।

इस जयकारे की जड़ें महाराष्ट्र के पुणे से 21 किमी दूर बसे चिंचवाड़ गांव में हैं। पंद्रवी शताब्दी में एक संत हुए, जिनका नाम था मोरया गोसावी। कहते हैं भगवान गणेश के आशीर्वाद से ही मोरया गोसावी का जन्म हुआ था और मोरया गोसावी भी अपने माता-पिता की तरह भगवान गणेश की पूजा अराधना करते थे।

हर साल गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर पर मोरया चिंचवाड़ से मोरगांव गणेश की पूजा करने के लिए पैदल जाया करते थे। कहा जाता है कि बढ़ती उम्र की

वजह से एक दिन खुद भगवान गणेश उनके सपने में आए और उनसे कहा कि उनकी मूर्ति उन्हें नदी में मिलेगी, और ठीक वैसा ही हुआ, नदी में स्नान के दौरान उन्हें गणेश जी की मूर्ति मिली।

संत मोरया अपने भक्तों से मंगलमूर्ति कहते थे और फिर ऐसे शुरुआत हुई मंगलमूर्ति मोरया की। परम भक्त मोरिया की भक्ति और आस्था के कारण

भगवान के साथ हमेशा के लिए जुड़ गया मोरया नाम।

॥ गणपति बप्पा मोरया ॥

 

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