कई सालो बाद बना आज गंगा सप्तमी पर विशेष योग !! करे बस ये दो काम मिलेगा १००० गुना फल !!!

कई सालो बाद बना आज गंगा सप्तमी पर विशेष योग !! करे बस ये दो काम मिलेगा १००० गुना फल !!!

हिंदू धर्म में नदियों को देवी के रूप में पूजा जाता है। इन्हीं देवियों में एक हैं मां गंगा। गंगा को हिंदुओं ने सबसे पवित्र नदी माना है, जो मानव के हर पाप को धो सकती है। गंगा सप्तमी इन्हीं देवी गंगा को समर्पित एक पर्व है। इस दिन को गंगा पूजन या गंगा जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन गंगा का पुनर्जन्म हुआ था।

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को गंगा सप्तमी कहते हैं। ऐसी मान्यता है कि गंगा की उत्पत्ति इसी दिन हुई थी। इस दिन गंगा नदी में स्नान कर पूजा करने का विशेष महत्व है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, इस दिन गंगा नदी में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस बार गंगा सप्तमी का पर्व 2 मई, मंगलवार को है।
धर्म ग्रंथों के अनुसार, जब कपिल मुनि के श्राप से सूर्यवंशी राजा सगर के 60 हजार पुत्र भस्म हो गए, तब उनके उद्धार के लिए राजा सगर के वंशज भगीरथ ने घोर तपस्या कर माता गंगा को प्रसन्न किया और धरती पर लेकर आए। गंगा के स्पर्श से ही सगर के 60 हजार पुत्रों का उद्धार हो सका।
गंगा को मोक्षदायिनी कहा जाता है। विभिन्न अवसरों पर गंगा तट पर मेले और गंगा स्नान के आयोजन होते हैं। इनमें कुंभ पर्व, गंगा दशहरा, व्यास पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा, माघी पूर्णिमा, मकर संक्रांति व गंगा सप्तमी आदि प्रमुख हैं।

इस विधि से करें स्नान

गंगा सप्तमी पर स्नान करते समय पहले रुद्राक्ष सिर पर रखें। इसके बाद जल सबसे पहले सिर पर डालें और यह मंत्र बोलें-
रुद्राक्ष मस्तकै धृत्वा शिर: स्नानं करोति य:।
गंगा स्नान फलं तस्य जायते नात्र संशय:।।
इसके अलावा ‘ऊं नम: शिवाय’ यह मंत्र भी मन ही मन बोलते रहें। इस मंत्र में रुद्राक्ष को सिर पर रखकर स्नान का फल गंगा स्नान के समान बताया गया है। यह उपाय घर या किसी भी तीर्थ स्नान के समय भी अपनाया जा सकता है। स्नान का यह तरीका तन के साथ मन को भी पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है।

आज करे बस ये दो काम

1.गंगा सप्तमी के दिन गंगा पूजन एवं स्नान से रिद्धि-सिद्धि, यश-सम्मान की प्राप्ति होती है। सभी पापों का क्षय होता है। मान्यता है कि इस दिन गंगा पूजन से मांगलिक दोष से ग्रसित जातकों को विशेष लाभ प्राप्त होता है। विधि-विधान से किया गया गंगा का पूजन अमोघ फल प्रदान करता है।

2.गंगा सप्तमी के अवसर पर्व पर मां गंगा में डुबकी लगाने से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते हैं और मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। वैसे तो गंगा स्नान का अपना अलग ही महत्व है, लेकिन इस दिन स्नान करने से मनुष्य सभी दुखों से मुक्ति पा जाता है। इस पर्व के लिए गंगा मंदिरों सहित अन्य मंदिरों पर भी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
कहा जाता है कि गंगा नदी में स्नान करने से दस पापों का हरण होकर अंत में मुक्ति मिलती है। इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है। शास्त्रों में उल्लेख है कि जीवनदायिनी गंगा में स्नान, पुण्यसलिला नर्मदा के दर्शन और मोक्षदायिनी शिप्रा के स्मरण मात्र से मोक्ष मिल जाता है।

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