चमत्कारी मंदिर जहाँ स्त्री रूप में पूजन होती है शिवजी की…!!पढे जरूर…!!!!

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लिंगाई माता मंदिर,यहाँ माता लिंग रूप में विराजित है

हमारे देश भारत के हर हिस्से में प्राचीन मंदिरो की भरमार है। इनमे से कई मंदिर तो बहुत प्रसिद्ध है जिनके बारे में सब लोग जानते है जबकि कई मंदिर अभी भी अधिकाँश लोगो की पहुँच से दूर है। आज हम लेकर आए है आपके लिए ऐसे ही मंदिर के बारे में जो अपने आप में अनोखा है ।यह अनोखा अनजान मंदिर है लिंगाई माता मंदिर जो की आलोर गाँव की गुफा में स्तिथ है। वास्तव में इस मंदिर में एक शिवलिंग है मान्यता है की यहाँ माता लिंग रूप में विराजित है। शिव व शक्ति के समन्वित स्वरूप को लिंगाई माता के नाम से जाना जाता है।

लिंगाई माता मंदिर,यहाँ माता लिंग रूप में विराजित है

छत्तीसगढ़ के फरसगांव विकासखंड में स्थित आलोर में एक पहाड़ी है और इस पहाड़ी पर एक छोटी सी गुफा के भीतर शिवलिंग के रुप में मौजूद है लिंगाई माता।ग्राम से लगभग 2 किमी दूर उत्तर पश्चिम में एक पहाड़ी है जिसे लिंगई गट्टा लिंगई माता के नाम से जाना जाता है।इस छोटी से पहाड़ी के ऊपर विस्तृत फैला हुआ चट्टान के उपर एक विशाल पत्थर है। बाहर से अन्य पत्थर की तरह सामान्य दिखने वाला यह पत्थर स्तूप-नुमा है इस पत्थर की संरचना को भीतर से देखने पर ऐसा लगता है कि मानो कोई विशाल पत्थर को कटोरानुमा तराश कर चट्टान के ऊपर उलट दिया गया है।

मंदिर से जुडी दो विशेष मान्यताएं

पहली मान्यता माता भविष्यवाणी करती है

पुरानी परंपराओं और मान्यताओं के मुताबिक लिंगाई माता के इस प्राकृतिक मंदिर में रोज पूजा-पाठ नहीं किया जाता हैं। बल्कि पूरे साल भर में सिर्फ एक दिन के लिए इस मंदिर का द्वार आम भक्तों के लिए खुलता है और इसी दिन यहां मेला भी लगता है।हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के बाद आनेवाले बुधवार को इस मंदिर के द्वार को खोल दिया जाता है।इस मंदिर में पूजा करने के बाद मंदिर को बंद कर दिया जाता है और फिर मंदिर के बाहर सतह पर रेत बिछा दी जाती है।अगले साल जब मंदिर के द्वार को फिर से खोलने का वक्त आता है तब इस रेत पर जो निशान मिलते हैं उससे पुजारी अगले साल के भविष्य का अनुमान लगाते हैं।कहा जाता है कि अगर रेत पर कमल का निशान हो तो धन संपदा में बढ़ोत्तरी होती है।हाथी के पांव के निशान हो तो ये उन्नति को सूचक होता है।घोड़ों के खुर के निशान हों तो युद्ध, बाघ के पैर के निशान हों तो आतंक, बिल्ली के पैर के निशान हों तो भय तथा मुर्गियों के पैर के निशान होने पर अकाल होने का संकेत माना जाता है।

दूसरी मान्यता संतान प्राप्ति को लेकर

इस मंदिर में आने वाले अधिकांश श्रद्धालु संतान प्राप्ति की मन्नत मांगने आते है। यहां मन्नत मांगने का तरीका भी निराला है। संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपति को खीरा चढ़ाना आवश्यक है प्रसाद के रूप में चढ़े खीरे को पुजारी, पूजा पश्चात दंपति को वापस करता है।दम्पति को शिवलिंग के सामने ही इस ककड़ी को अपने नाखून से चीरा लगाकर दो टुकड़ों में तोडना होता है और फिर सामने ही इस प्रसाद को दोनों को ग्रहण करना होता है। मन्नत पूरी होने पर अगले साल श्रद्धा अनुसार चढ़ावा चढ़ाना होता है।

॥ जय लिंगाई माता ॥