हिन्दू धर्म का असली दुश्मन कौन??? … पढ़कर आप भी माना नही कर पाएँगे..!!!

हिन्दू धर्म का दुश्मन कौन …

पिछले कई वर्षों में हिन्दुत्व को लेकर व्यावसायिक संतों, ज्योतिषियों और धर्म के तथाकथित संगठनों और राजनीतिज्ञों ने हिन्दू धर्म के लोगों को पूरी तरह से गफलत में डालने का जाने-अनजाने भरपूर प्रयास किया, जो आज भी जारी है। हिन्दू धर्म की मनमानी व्याख्या और मनमाने नीति-नियमों के चलते खुद को व्यक्ति एक चौराहे पर खड़ा पाता है। समझ में नहीं आता कि इधर जाऊं या उधर।

ढोंगी संत

ढोंगी संतों और पोंगा-पंडितों ने वेद, पुराण और गीता की मनमानीव्याख्‍या कर मनमाने रीति-रिवाज और पूजा-पाठ विकसित करते गए। लोगअनेकों संप्रदाय में बँटते गए और बँटते जा रहे हैं। संत निरंकारीसंप्रदाय, ब्रह्माकुमारी संगठन, जय गुरुदेव, गायत्री परिवार, कबिर पंथ, साँई पंथ, राधास्वामी मत आदि अनेकोंसंगठन और सम्प्रदाय में बँटा हिंदूसमाज वेद को छोड़कर भ्रम की स्थिति में नहीं है तो क्या है?

भ्रमित समाज लक्ष्यहीन हो जाता है। लक्ष्यहीन समाज में मनमाने तरीके से परंपरा का जन्म और विकास होता है, जो कि होता आया है। मनमाने मंदिर बनते हैं, मनमाने देवता जन्म लेते हैं और पूजे जाते हैं। मनमानी पूजा पद्धति, त्योहार, चालीसाएं, प्रार्थनाएं विकसित होती हैं। व्यक्ति पूजा का प्रचलन जोरों से पनपता है। भगवान को छोड़कर संत, कथावाचक या पोंगा-पंडितों को पूजने का प्रचलन बढ़ता है।

वर्तमान दौर में अधिकतर नकली और ढोंगी संतों और कथावाचकों की फौज खड़ी हो गई है। धर्म को पूरी तरह अब व्यापार में बदल दिया गया है। धार्मिक चैनलों को देखकर जरा भी अध्यात्म की अनुभूति नहीं होती। सभी पोंगा-पंडित अपने अपने प्रॉडक्ट लेकर आ जाते हैं। अजीब-अजीब तरह के तर्क देते हैं और धर्म की मनमानी व्याखाएं करते हैं।

विदेशियों की गुलामी

गुलामीके दिनों में विदेशी और विधर्मी शासकों ने हिन्दू समाज में फूट डालने केलिए अनेकों तरह से असमानता के बीज बोये थे. गुलामी स्वीकार करने वालेहिन्दुओं से, धर्म ग्रंथों की मनमानी व्याख्या करवा कर हिन्दुओं में हीनभावना और फूट डालने का काम करते रहे.हिन्दू धर्म ग्रथों को जलाना, मन्दिरों को तोडना, देवी-देवताओं के अश्लीलचित्र बनाना, उनके बारे में अपशब्द बोलना इनकी घृणित मानसिकता का प्रमाण है

वेदों का अभद्र वर्णन ग्रिफिथ या मैक्स मूलर ने किया – वे मूलतः धर्मांतरण केविषाणु ही थे

INTERNET   इंटरनेट

हिन्दुत्व कोदुनिया के समक्ष सर्वाधिक अश्लील धर्म के रूप में प्रस्तुत करना | बहुत सारे साइट्स पर आप इससे संबंधित अनगिनत लेख पाएंगे | भारत जैसे विभिन्न संस्कृतियों वाले देशमें केवल हिंदू धर्म को निशाना बनाकर सामाजिसक सद्भाव बिगाड़ने की अब सोशल मीडिया साइट ‘फेसबुक’ पर गहरी साजिश चल रही है, जिससे हिंदू इंटरनेट यूजर्स की भावनाओं को ठेसपहुंच रही है।  दूसरे शब्दों में कहें तो कुछ लोगों ने फेसबुक पर पोर्नअभिनेत्रियों और हिंदू सिद्धांतों के विरुद्ध फोटो और कमेंट्स पोस्ट करनेके लिए एक मुहिम चला रखी है। फेसबुक ग्रुप I Love Hinduism  ( मैं हिंदूधर्म से प्रेम करता/करती हूं या गर्व से कहो हम हिंदू हैं), पर अश्लीलसामग्री पोस्ट्स की भरमार हो गई है। जो आपत्तिजनक और हिंदू संस्कृति के विरुद्ध है।

धर्मांतरण

धर्मांतरण ने अब एक चतुर खेल की शक्ल अख्तियार कर ली है | एक ही मतप्रसार के लिए अनेक प्रकार के उपायों का प्रचुर दाव – पेचों केसाथ उपयोग किया जा रहा है | व्यापक स्तर पर धर्मांतरण करने के लिए जोहिन्दुओं को सिर्फ इस्लाम में शामिल करना चाहते हैं या जो चाहते हैं किहिन्दू बाइबल को ही गले लगायें, उनकी प्रमुख कूट चाल है – हिन्दुत्व कोदुनिया के समक्ष सर्वाधिक अश्लील धर्म के रूप में प्रस्तुत करना |

आज यह बेहद गंभीर मसला बन चुका है| भारी संख्या में अपने सत्य धर्म से अनजान हिन्दू, आतंरिक और बाहरी चालबाजियों का शिकार बन रहें हैं और अंततः इस अपप्रचार में फंस कर भ्रान्तिवश अपने धर्म से नफ़रत करना शुरू कर देते हैं | उनके लिए हिंदुत्व का मतलब – राधा-कृष्ण के अश्लील प्रणय दृश्य, शिवलिंग के रूप में पुरुष जननेंद्रिय की पूजा, शिव का मोहिनी पर रीझना, विष्णु और शिव द्वारा स्त्रियों का सतीत्व नष्ट करना, ब्रह्मा का अपनी पुत्री सरस्वती पर आसक्त होना इत्यादि, इत्यादि से ज्यादा और कुछ नहीं रह जाता | हमारी जानकारी में ऐसे कई पत्रक (pamphlets) भारतभर में वितरित किए जा रहे हैं और उन में हिन्दुओं से अपील की जा रही है कि वे सच्चे ईश्वर और सच्ची मुक्ति को पाने के लिए विदेशी मज़हबों को अपनाएं | बहुत से हिन्दू अपनी बुनियाद से घृणा भी करने लगे हैं और जो हिंदुत्व के चाहनेवाले हैं, वे निश्चित नहीं कर पाते हैं कि कैसे इन कहानियों का स्पष्टीकरण दिया जाए और अपने धर्म को बचाया जाए ईसाइयों की प्रारम्भक से ही यह मंशा रही है कि वे सम्पूोर्ण विश्वद को ईसाई बना दें, इसीकारण भारत में भी उनका प्रयास जारी है। भारत के वनाचंलों में इनके द्वारा किये जा रहे प्रयासों को स्पंष्टश देखा जा सकता है। अण्ड मान निकोबार की कहानी तो दिल दहला देने वाली है।

यदि हिन्दू समाज में दलितो आदिवासियो को सम्मान दिया होता उन्हें उनके गरीबी वाली हाल पर न छोड़ा होता तो किसी में भी ये ताकत नहीं थी कि वो किसी का धर्म परिवर्तन करा लेता , अफसोस होता है हिन्दू समाज के बड़े ठेकेदार इस धर्म परिवर्तन पर छाती तो पीटते है किन्तु सेवा के नाम पर लालच दे कर हो रहे इस धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए जमीनी कार्य नहीं करते है , डराने धमकाने की जगह उन्हें अस्पताल स्कुल और नौकरी दी जाये तो इस लालच में हो रहे धर्म परिवर्तन रुक सकते है मंदिरो में पड़े करोडो अरबो रुपये रख कर क्या फायदा होगा यदि एक बड़ा वर्ग हिन्दू ही नहीं रहेगा , जरुरत शहरो ओए सुविधा वाली जगहो पर इन्हे खर्च करने की नहीं है बल्कि वहा है जहा लोग असुविधा के बिच रह रहे है , किन्तु दलितो और आदिवासियो की सेवा करना ही कौन चाहता है , जब आप उन्हें समाज में सम्मान नहीं दे सकते या दिला सकते है तो फिर धर्म परिवर्तन को लेकर किसी को रोना भी नहीं चाहिए

कुछ भी जो वेदों के ख़िलाफ़ है, धर्म नहीं है | हमारे वेदों के मूलभूत विचारों को अगर हम ने पकड़ कर नहीं रखा, कोई सशक्तउपाय नहीं किया एवं चौकन्ने नहीं हुए तो बहुत आसानी से हिन्दू समाज भीसंक्रमित हो जाएगा|हिन्दुत्व का मूल्यांकन वेदों से और उसके मूलभूत सिद्धांतों से किया जानाचाहिए ना कि गलत अनुगामियों से या मिथ्या कथाओं से – जो बाद में गढ़ ली गईं | अतः हिन्दुत्व सिर्फ़ नैतिकता,शुद्धता और चरित्र पर ही आधारित है |

आज समय की आवश्यकता है कि एक बार फिर धर्म कीसमीक्षा करके हिन्दू समाज को एकजुटकरने के लिए नए नियम प्रतिपादित किये जाएँ.

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