जीवन को सफल बनाने के लिए माँ दुर्गा के सिद्ध चमत्कारी मंत्र अवश्य पढिये..!!!

मां दुर्गा के सिद्ध चमत्कारी मंत्र –

हिन्दुओं में भगवती दुर्गा को ही दुनिया की पराशक्ति और सर्वोच्च देवी माना जाता है| दुर्गा असल में शिव की पत्नी पार्वती का ही एक
रूप हे जिसकी उत्पत्ति राक्षसों का नाश करने के लिये देवताओं की प्रार्थना पर पार्वती ने लिया था| इस तरह दुर्गा युद्ध की देवी हैं।
देवी दुर्गा के स्वयं कई रूप हैं। मुख्य रूप उनका “गौरी” है, अर्थात शांतमय, संदर और गोरा| उनका सबसे भयानक रूप काली है,
अर्थात काला रूप। माँ दुर्गा की सवारी शेर हे और कुछ दुर्गा मंदिरों में पशुबलि भी चढाई जाती हे| विभिन्न रूपों में दुर्गा माँ भारत के
साथ-साथ नेपाल में भी पूजी जाती हे| माँ दुर्गा के सप्तशती में कुछ ऐसे सिद्ध मंत्र हैं, जिनके द्वारा हम अपनी मनोकामना की पूर्ति
कर सकते हैं।

sher pr sawar maa dura

प्रस्तुत हे, जीवन को सफल बनाने के लिए माँ दुर्गा के सिद्ध चमत्कारी मंत्र –

* ऐश्वर्य, सौभाग्य, आरोग्य, संपदा प्राप्ति एवं शत्रु भय मुक्ति के लिए –

ऐश्वर्य यत्प्रसादेन सौभाग्य-आरोग्य सम्पदः।
शत्रु हानि परो मोक्षः स्तुयते सान किं जनै॥

* विघ्ननाशक मंत्र –

सर्वबाधा प्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरी।
एवमेव त्याया कार्य मस्माद्वैरि विनाशनम्‌॥

* आरोग्य एवं सौभाग्य प्राप्ति के चमत्कारिक फल देने वाले मंत्र को स्वयं देवी दुर्गा ने देवताओं को दिया है :-

देहि सौभाग्यं आरोग्यं देहि में परमं सुखम्‌।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

* आरोग्य एवं सौभाग्य प्राप्ति के चमत्कारिक फल देने वाले मंत्र को स्वयं देवी दुर्गा ने देवताओं को दिया है :-

देहि सौभाग्यं आरोग्यं देहि में परमं सुखम्‌।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

* विपत्ति नाश के लिए –

शरणागतर्द‍िनार्त परित्राण पारायणे।
सर्व स्यार्ति हरे देवि नारायणि नमोऽतुते॥

* सर्वकल्याण हेतु –

सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके ।
शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणि नमोस्तुऽते॥

* बाधा मुक्ति एवं धन-पुत्रादि प्राप्ति के लिए –

सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो धन धान्य सुतान्वितः।
मनुष्यों मत्प्रसादेन भव‍िष्यंति न संशय॥

मंत्रो के जाप की विधि : –

नवरात्रि के प्रतिपदा के दिन घटस्थापना के बाद संकल्प लेकर प्रातः स्नान करके दुर्गा की मूर्ति या चित्र की पंचोपचार या दक्षोपचार या
षोड्षोपचार से गंध, पुष्प, धूप दीपक नैवेद्य निवेदित पूजा करें। मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।
शुद्ध-पवित्र आसन ग्रहण कर रुद्राक्ष या तुलसी या चंदन की माला से मंत्र का जाप एक माला से पांच माला तक पूर्ण कर अपना मनोरथ
कहें। पूरी नवरात्रि जाप करने से वांच्छित मनोकामना अवश्य पूरी होती है।