धरती पर अद्भुत देव अदालत ,जहाँ देवताओं को मिलती है सजा ए मौत, जरूर पढ़े..!!!

धरती पर अद्भुत देव अदालत ,जहाँ देवताओं को मिलती है सजा ए मौत, जरूर पढ़े..!!!

भंगाराम देवी का मंदिर
भंगाराम देवी का मंदिर

छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के केशकाल नगर में भंगाराम देवी का मंदिर है। यहाँ पर हर साल भादवे के महीने में जात्रा आयोजित किया जाता है। हर साल लगने वाले इस जात्रे में सभी ग्रामवासी अपने अपने ग्राम के देवी देवताओं को लेकर यहाँ पहुंचते है। आरोपी होते है देवी देवता और फरियादी होते है ग्रामवासी। इस देव अदालत में सभी देवी देवताओं की पेशी की जाती है और जिस देवी देवता के खिलाफ शिकायत होती है उसकी फ़रियाद भंगाराम देवी से की जाती है।

ग्रामवासी अपने अपने ग्राम के देवी देवताओं को लेकर यहाँ पहुंचते है
ग्रामवासी अपने अपने ग्राम के देवी देवताओं को लेकर यहाँ पहुंचते है

सबकी शिकायते सुनने के बाद शाम को भंगाराम देवी अपने फैसले सुनाती है। असल में इस पूरी प्रक्रिया में भंगाराम देवी का एक पुजारी बेसुध हो जाता है। लोगो के अनुसार उसके अंदर स्वयं देवी आ जाती हैं। और फिर देवी उसी के माध्यम से अपने फैसले सुनाती है।

मृत्युदंड दिए जाने की अवस्था में मूर्ति खंडित कर दी जाती है जबकि निष्कासन की सजा पाये देवी देवताओं की मुर्तिओं को मंदिर के पास ही बानी एक

मृत्युदंड दिए जाने की अवस्था में मूर्ति खंडित कर दी जाती है
मृत्युदंड दिए जाने की अवस्था में मूर्ति खंडित कर दी जाती है

खुली जेल में छोड़ दिया जाता है। निश्चित अवधि की सजा पाए देवी देवता की वापसी अवधि पूरी होने पर होती है जबकि अनिश्चितकालीन निष्कासन की सजा पाए देवी देवता की वापसी तब होती है जब वे अपनी गलतियों को सुधारते हुए भविष्य में लोक कल्याण के कार्यों को प्राथमिकता देने का वचन देते हैं। यह वचन सजा पाए देवी-देवता संबंधित पुजारी को स्वप्न में आकर देते हैं। वापसी से पूर्व उनकी विधि विधान से पूजा की जाती है और फिर

सम्मानपूर्वक उनको ले जाकर मंदिर में पुनः स्थापित कर दिया जाता है।

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