एक ऐसा रहस्यमयी मँदिर जहां रात को रुकने से हो जाती है मौत!!!

एक ऐसा रहस्यमयी मँदिर जहां रात को रुकने से हो जाती है मौत!!!

भारत में अनेकों देवी देवता है जितने देवी देवता है उससे ज्यादा’ उनके चमत्कार की कथाए । क्या आपने कभी सुना है की मँदिर में रुकने से किसी की मौत हो गयी हो?? जी हां आज हम आपको ऐसे मँदिर कें बारे मे बताएँगे जहां रात को रुकने से उसकी मौत हो जाती है।

मैहर धाम
मैहर धाम

मध्यप्रदेश के सतना जिले में स्थित मैहर धाम जो माँ शारदा का एक प्रसिद्ध मंदिर है। इस मंदिर में आने वाले प्रत्येक भक्त की हर एक मनोकामना पूर्ण होती है। चाहे वह विवाह , संतान , नौकरी ,या अन्य कोई भी हो माता रानी भक्तों पर अपनी विशेष कृपा करती है. और उनके कष्ट -क्लेशों को दूर करती है। माँ का यह स्थान न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि इस मंदिर में विविध आयाम भी हैं।माँ के इस स्थान तक पहुँचने के लिए 1063 सीढिय़ां बनाई गई है। इस मंदिर में दर्शन के लिए हर वर्ष लाखों भक्तों की भारी भीड़ जमा होती है. दूर-दूर से भक्त आते है।

बहुत पुरानी है मंदिर की कहानी

इस मंदिर की उत्पत्ति के पीछे एक बहुत ही प्राचीन कहानी है जिसके अनुसार सम्राट दक्ष की पुत्री सती, भगवान शिव से शादी करना चाहती थीं परंतु राजा दक्ष इसके खिलाफ थे।एक बार राजा दक्ष ने एक यज्ञ किया। इस यज्ञ में ब्रह्मा, विष्णु, इंद्र और अन्य देवी-देवताओं को भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन जान-बूझकर उन्होंने भगवान महादेव को नहीं बुलाया।महादेव की पत्नी और दक्ष की पुत्री सती इससे बहुत दुखी हुईं और यज्ञ-स्थल पर सती ने अपने पिता से भगवान शिव को आमंत्रित न करने का कारण पूछा, इस पर दक्ष ने भगवान शिव के बारे में अपशब्द कहा, तब इस अपमान से पीड़ित होकर सती मौन होकर उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठ गईं और योग द्वारा वायु तथा अग्नि तत्व को धारण करके अपने शरीर को अपने ही तेज से भस्म कर दिया, जब शिवजी को इस दुर्घटना का पता चला तो क्रोध से उनका तीसरा नेत्र खुल गया और यज्ञ का नाश हो गया। तब भगवान शंकर ने माता सती के पार्थिव शरीर को कंधे पर उठा लिया और गुस्से में तांडव करने लगे।

माँ शारदा की प्रतिमा
माँ शारदा की प्रतिमा

भगवान विष्णु ने सती के शरीर को बावन हिस्सों में विभाजित कर दिया। जहाँ-जहाँ सती के शव के अंग और आभूषण गिरे, वहां-वहां शक्ति पीठों का निर्माण हुआ। उन्हीं में से एक शक्ति पीठ है मैहर देवी मंदिर, जहां मां सती का हार गिरा था। मैहर का मतलब है, मां का हार, इसीलिये इस स्थल का नाम मैहर पड़ा। अगले जन्म में सती ने हिमाचल राजा के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया और घोर तपस्या कर शिवजी को फिर से पति के रूप में प्राप्त किया। 

रात को रुकना मना है-

इस मंदिर में आने वाले प्रत्येक भक्त की हर एक मनोकामना पूर्ण होती है। इस मंदिर में दर्शन के लिए हर वर्ष लाखों भक्तों की भारी भीड़ जमा होती है. दूर-दूर से भक्त आते है जानें क्यों रात्रि में यहाँ नहीं रुक सकते भक्त – यह मैहर माता का मंदिर सिर्फ रात्रि 2 से 5 बजे तक बंद किया जाता है, इसके पीछे एक बहुत ही बड़ा रहस्य छुपा है। वस्तुत: ऐसी मान्यता है कि आल्हा और ऊदल, माता के सबसे बड़े भक्त आज तक, इतने वर्षों के बाद भी माता के पास आते हैं। रात्रि 2 से 5 बजे के बीच आल्हा और ऊदल, आज भी रोज़ मंदिर आकर माता रानी का सबसे पहले दर्शन करते हैं। और उनकी आराधना , पूजा-पाठ , माँ का श्रृंगार भी करते है । आपने भी सुना होगा की विज्ञान दृष्टिकोण से धर्म को लेकर बहुत से सवाल उठते है।पर चाहे वो मैहर शारदा मां का मंदिर हो या फिर मथुरा का निधि वन, धर्म के आगे विज्ञान भी घुटने टेक लेता है. यह आज भी सत्य है की रात्रि 2 से सुबह 5 बजे के दौरान कोई भी मंदिर में न ही रुक सकता और न ही इस समय में जा सकता अन्यथा उसकी मौत अवश्य होगी ऐसा प्रमाणित है ।  मानव तो क्या अन्य जीव भी इस दौरान इस स्थान को छोड़ देते है।

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