पढ़िए..!!किस देवता की पूजा करने से मिलता है व्यक्ति को स्वास्थ्य, सौंदर्य, प्रेम और सम्मान…!!!

पढ़िए..!!किस देवता की पूजा करने से मिलता है व्यक्ति को स्वास्थ्य, सौंदर्य, प्रेम और सम्मान…!!!

आज हम आपको बता रहे है व्यक्ति के जीवन में स्वास्थ्य, सौंदर्य, प्रेम, सम्मान और पारिवारिक सुख व शांति देने के लिए चंद्र देव की उपासना की जाती है। जीवन में मानसिक कष्ट के निवारण, कार्य सिद्धि और व्यापार में लाभ के लिए कम से कम दस और अधिक से अधिक 54 सोमवार को चंद्र देव का व्रत रखते हुए नमक रहित भोजन करना चाहिए।चंद्र देव से पीड़ित जातकों में पेट के रोग, गैस की समस्या, आंत्र की सूजन, ट्यूमर, डायबिटीज़, शरीर में दर्द, बुखार, जुकाम, गठिया, वाट रोग, मूत्र रोग, पथरी आदि समस्याएं होने की संभावना रहती है।

स्वास्थ्य, सौंदर्य, प्रेम, सम्मान और पारिवारिक सुख व शांति के लिए चंद्र देव की उपासना की जाती है। इसके लिए श्वेत वस्त्र धारण करके चंद्र देव को रात्रि में जल अर्पित कर दही, दूध, चीनी और घी से निर्मित भोजन का प्रसाद लगाकर ग्रहण करना चाहिए।चंद्र देव की उपासना के लिए प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव की स्तुति करना और चांदी की धातु में शुद्ध मोती जड़वाकर शुक्ल पक्ष के सोमवार को धारण करने से भी चंद्र देव प्रसन्न होते हैं। चंद्र देव से संबंधित वस्तुओं जैसे शंख, दूध, दही, मोती, चांदी, श्वेत वस्त्र, चीनी, श्वेत गाय या बैल, मैदा, आटा आदि का सोमवार के दिन दान करना भी शुभ प्रभाव देने वाला होता है।

चंद्र देव शुभ, सौम्य शांत और शीतल ग्रह माने गए हैं जो पृथ्वी पर अमृत वर्षा करके सभी को दीर्घायु और आरोग्य प्रदान करते हैं परंतु अशुभ होने पर प्रतिकूल प्रभाव भी देते हैं। चंद्र देव की अशुभता के कारण होने वाले विभिन्न रोगों के उपचार के लिए इनके मंत्रों का विधान पूर्वक उच्चारण किया जाता है।सर्दी-जुकाम के निवारण के लिए “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करना चाहिए। पित्ताशय की पथरी में “ॐ सोम सोमाय नमः”, खांसी से निजात पाने के लिए “ॐ ऐं ह्रीं सोमाय नमः”, तथा महिलाओं की मासिक धर्म सम्बन्धी समस्याओं के निराकरण के लिए “ॐ श्राम श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः” मंत्रों का जप करने से लाभ मिलता है।चंद्र देव के बीजमंत्र “ॐ श्राम श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः” का विधि पूर्वक जप करने से चंद्र देव के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं और चंद्र देव की कृपा मिलने लगती है।

समस्त देवता, यक्ष, मनुष्य, भूत, पशु-पक्षी, वृक्ष आदि के प्राणों का आप्यायन करने वाले चंद्रदेव मन के कारक हैं। जिस तरह समुद्र के खारी जल में इनके कारण ज्वार आता है उसी प्रकार मनुष्य के शरीर में मौजूद रक्त की क्षारीय प्रकृति के कारण पूर्णिमा और अमावस्या तिथि पर चंद्रदेव अपना प्रभाव छोड़ते हैं।

 

॥ जय चंद्र देव ॥