जाने ब्रह्मा जी का अपनी ही पुत्री से विवाह करने का अद्भुत रहस्य..!!!

जाने ब्रह्मा जी का अपनी ही पुत्री से विवाह करने का अद्भुत रहस्य..!!!

ब्रह्मा जी का अपनी ही पुत्री से विवाह करने का अद्भुत रहस्य
ब्रह्मा जी का अपनी ही पुत्री से विवाह करने का अद्भुत रहस्य

हिन्दू धर्म में कई ऐसी कहानिया है जिनसे जुड़े पौराणिक इतिहास पर नजर डालें तो ऐसी कहानियां सुनने को मिल जाएंगी जिनसे अभी तक आमजन वाकिफ नहीं हैं। विस्तृत इतिहास होने की वजह से कुछ घटनाएं छूट जाती हैं तो कुछ नजरअंदाज कर दी जाती हैं। इन्हीं कहानियों में से एक हैं सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा का अपनी ही बेटी के साथ विवाह करने की घटना।आपको पता है की इस सृष्टि का निर्माण ब्रह्मा जी ने किया था लेकिन ब्रह्मा जी की पत्नी कौन थी इसका आपको पता नही होगा आपको बतादे की ब्रह्मा जी ने अपनी ही पुत्री से शादी की थी और उनकी पुत्री का नाम सरस्वती था जो की विद्या की देवी है यह सब सुनाने में बहुत अजीब है लेकिन ये सच है कि ब्रह्मा जी ने अपनी ही बेटी से शादी की थी लेकिन ब्रह्मा जी ने इस क्यों किया था आइये जानते है इसके पीछे का रहस्य।

सरस्वती पुराण के अनुसार सृष्टि की रचना करते समय ब्रह्मा ने सीधे अपने वीर्य से सरस्वती को जन्म दिया था। इसलिए ऐसा कहा जाता है कि सरस्वती की कोई मां नहीं केवल पिता, ब्रह्मा थे।विद्या की यह देवी बेहद खूबसूरत और आकर्षक थीं कि स्वयं ब्रह्मा भी सरस्वती के आकर्षण और उनके पास मौजूद ज्ञान से खुद को बचाकर नहीं रख पाए और उन्हें अपनी अर्धांगिनी बनाने पर विचार करने लगे।सरस्वती ने अपने पिता की इस मनोभावना को भांपकर उनसे बचने के लिए चारों दिशाओं में छिपने का प्रयत्न किया लेकिन उनका हर प्रयत्न बेकार साबित हुआ। इसलिए विवश होकर उन्हें अपने पिता के साथ विवाह करना पड़ा।ब्रह्मा और सरस्वती करीब 100 वर्षों तक एक जंगल में पति-पत्नी की तरह रहे। इन दोनों का एक पुत्र भी हुआ जिसका नाम रखा गया था स्वयंभु मनु।

मत्स्य पुराण के अनुसार ब्रह्मा के पांच सिर थे। कहा जाता है जब ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की तो वह इस समस्त ब्रह्मांड में अकेले थे। ऐसे में उन्होंने अपने मुख से सरस्वती, सान्ध्य, ब्राह्मी को उत्पन्न किया।ब्रह्मा अपनी ही बनाई हुई रचना, सरवस्ती के प्रति आकर्षित होने लगे । ब्रह्मा की दृष्टि से बचने के लिए सरस्वती चारो दिशाओं में छिपती रहीं लेकिन वह उनसे नहीं बच पाईं।इसलिए सरस्वती आकाश में जाकर छिप गईं लेकिन अपने पांचवें सिर से ब्रह्मा ने उन्हें आकाश में भी खोज निकाला और उनसे सृष्टि की रचना में सहयोग करने का निवेदन किया। सरस्वती से विवाह करने के पश्चात सर्वप्रथम मनु का जन्म हुआ।

ब्रह्मा और सरस्वती की यह संतान मनु को पृथ्वी पर जन्म लेने वाला पहला मानव कहा जाता है। इसके अलावा मनु को वेदों, सनातन धर्म और संस्कृत समेत समस्त भाषाओं का जनक भी कहा जाता है।

ब्रह्मा जी ने ऐसा सिर्फ सृष्टि निर्माण करने के लिए करा था ।

॥ जय ब्रह्म देव सरस्वती ॥

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