आज जानिये ऐसा कौनसा श्राप दिया था ब्रम्हा जी की पत्नी ने जिसकी वजह से दुनिया क्या पुरी सृष्टि में ही ब्रम्हा जी को नहीं पूजा जाता !!

हिंदू धर्म के पुराणों में माना जाता है कि सृष्टि का निर्माण भगवान ब्रह्मा जी ने किया था लेकिन आप जानते हैं कि इनकी पूजा कहीं नहीं की जाती है। पुराणों के अनुसार दुनिया भर में ब्रह्मा जी के केवल दो ही मंदिर है। और इन मंदिरों में भी इनकी पूजा नहीं की जाती है ना ही भारत में इनसे संबंधित कोई भी उत्सव और व्रत नहीं है हिंदू पुराणों में इसमें कई बार कई पुरानी कथाएं मिलती है। जिसके अनुसार माना जाता है कि ब्रह्मा जी को उनकी पत्नी के श्राप के कारण नहीं पूजा जाता है आखिर ऐसा क्या हुआ कि कभी भी इनकी पूजा नहीं की जाती।

सृष्टि के आरंभ में ही आदिशक्ति ने अपने स्वरूप से सरस्वती को उत्पन्न करके ब्रह्मा जी को पत्नी स्वरूप भेंट किया।ताकि ब्रह्माजी सृष्टि निर्माण का काम पूरा कर सकें। सृष्टि निर्माण का काम पूरा होने के बाद एक दिन पवित्र उद्देश्य को पूरा करने के लिए ब्रह्मा जी ब्रह्म लोक से निकलकर पृथ्वी पर पधारे पृथ्वी पर आकर उन्होंने सबसे उत्तम मुहूर्त में यज्ञ का आयोजन किया। लेकिन एक समस्या यह थी कि बिना पत्नी के यज्ञ पूरा नहीं हो सकता था प्रमोद शुभ मुहूर्त नहीं देना चाहते थे। इसलिए संसार के कल्याण हेतु एक ऐसी कन्या से विवाह कर लिया जो बुद्धिमान होने के साथी शास्त्रों का भी ज्ञान रखती थी। इस कन्या का नाम शास्त्रों में पुराणों में गायत्री बताया गया।

गायत्री से विवाह करने के बाद ब्रह्मा जी ने यज्ञ करना शुरु कर दिया। देवी सरस्वती ब्रह्मा जी को तलाशते हुए तीर्थ नगरी पुष्कर में पहुंची जहां ब्रह्मा जी गायत्री के साथ यज्ञ कर रहे थे ब्रह्मा जी के साथ दूसरी स्थिति को देखकर सरस्वती क्रोधित हो उठी और ब्रह्मा जी को श्राप दे दिया कि पृथ्वी के लोग ब्रह्मा को भुला देंगे ।और कभी इनकी पूजा नहीं होगी किंतु अन्य देवताओं की प्रार्थना पर सरस्वती का क्रोध कम हुआ और उन्होंने कहा कि ब्रह्मा जी का केवल पुष्कर में ही पूजन किया जाएगा इसलिए पृथ्वी पर केवल पुष्कर में ही ब्रह्मा जी का प्राचीन मंदिर है।

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