बोधेश्वर महादेव मंदिर में आते हैं हजारों सांप और दूर होते हैं ‘असाध्य रोग’ :

बोधेश्वर महादेव मंदिर की बनावट बेहद खूबसूरत है एवं इसे 15वीं शताब्दी की कलाकृति कही जाती है। मंदिर में स्थापित पंचमुखी शिवलिंग के पत्थर के विषय में ऐसा कहा जाता है कि यह पत्थर दुर्लभ है और 400 साल पहले विलुप्त हो चुका है।

उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के बांगरमऊ के पास स्थित बोधेश्वर महादेव मंदिर को लेकर लोगों में गहन आस्था है। इस मंदिर को लेकर ऐसा कहा जाता है कि मंदिर स्थित शिवलिंग के स्पर्श मात्र से ही लंबे समय से पीड़ित गंभीर रोग दूर हो जाते हैं। इतना ही नहीं, इस मंदिर में दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु आते हैं एवं दर्शन के साथ ही अपने रोगों से मुक्ति पाते हैं।

क्या है इस मंदिर की कहानी?

इस मंदिर को लेकर एक कथा बेहद प्रचलित है जिसके अनुसार ऐसा कहा जाता है कि एक बार नेवल के राजा को भगवान शिव ने सपने में आकर पंचमुखी शिवलिंग, नंदी और नवग्रह स्थापित करने के आदेश दिए। शिव भगवान से आदेश प्राप्त करने के बाद राजा ने इस कार्य को प्रारंभ किया और जब पंचमुखी शिवलिंग, नंदी और नवग्रह का निर्माण हो गया तो रथ पर इन्हें लेकर नगर में प्रवेश किया जाने लगा। तभी अचानक रथ का पहिया जमीन में धंसने लगा व लाख प्रयास के बाद भी रथ के पहिए को जमीन से नहीं निकाला जा सका। अंत में राजा ने उसी स्थान पर शिवलिंग, नंदी तथा नवग्रह की स्थापना कर भव्य मंदिर का निर्माण कराया। वही शिव भगवान द्वारा बोध कराए जाने के कारण इस मंदिर को ‘बोधेश्वर महादेव’ का मंदिर कहा जाता है।

इस मंदिर की बनावट :

इस मंदिर की बनावट बेहद खूबसूरत है तथा इसे 15वीं शताब्दी की कलाकृति कही जाती है। मंदिर में स्थापित पंचमुखी शिवलिंग के पत्थर के विषय में ऐसा कहा जाता है कि यह पत्थर दुर्लभ है और 400 साल पहले विलुप्त हो चुका है। अब धरती पर यह पत्थर नहीं पाए जाते हैं। वहीं नंदी और नवग्रह में जो पत्थर लगे हैं, उन पर पाषाण काल की पच्चीकारी की गई है जो अपने आप में बहुत अद्भुत है।

सांपों को लेकर है मान्यता :

यहां के रहने वाले स्थानीय लोग ऐसा कहते हैं कि आधी रात को हजारों की संख्या में इस मंदिर में सांप आते हैं और शिवलिंग के स्पर्श के बाद वापस जंगलों की तरफ चले जाते हैं। हालांकि लोग यह भी बताते हैं कि आज तक इन सांपों द्वारा स्थानीय लोगों को हानि नहीं पहुंचाई गई है। ये सांप चुपचाप आते हैं व शिवलिंग के स्पर्श के बाद वापस अपने धाम को चले जाते हैं। 

यहां दूर होते हैं असाध्य रोग :

इस मंदिर के विषय में यह भी प्रचलित है कि लोग यहाँ आकर मंदिर के शिवलिंग को स्पर्श करते हैं तथा उनके लम्बे समय से चले आ रहे असाध्य रोग भी ठीक हो जाते हैं। 

ज़ाहिर तौर पर लोगों की आस्था यहाँ से जुड़ी हुई है।