‘शिव लिंग क्या है’, ‘लोग एक लिंग की पूजा क्यू करते है’, ‘शिव जी का जन्म कब हुआ, कैसे हुआ’…!!??!!

बहुत से लोग बहुत तरह से सवाल पूछते है, और जानकारी ना होने की वजह से या अधूरी जानकारी के कारण वो बेवजह ग़लत बातें करते है. बहुत से लोग पूछते है – ‘शिव लिंग क्या है’, ‘लोग एक लिंग की पूजा क्यू करते है’, ‘शिव जी का जन्म कब हुआ, कैसे हुआ’.

जब भगवान शिव ने सोचा की, सृष्टि (यूनिवर्स) का निर्माण किया जाए, तब उन्होने भगवान विष्णु को जन्म दिया ओर विष्णु भगवान के नाभि से भगवान ब्रम्‍हा उत्पन्न हुए. लेकिन जब दोनो का जन्म हुआ तो उन्हे ये ही ऩही पता था की.. वो कहाँ से आए, कैसे आए! दोनो ही बेहद शक्तिशाली थे, और बात-बात मे दोनो मे बहस शुरू हो गई की कोन ज़्यादा शक्तिशाली है, कोन बड़ा है, इसी बात पर वो आपस मे ही लड़ने लगे. ये युद्ध 10000 साल (दस हजार साल) तक चला.

तब भगवान शिव एक विशाल पठार (लिंग) के रूप मे दोनो के बीच मे आ गये, जिसमे से बहूत शक्ति (ज्वाला) निकल रही थी. और फिर ये आकाशवाणी हुई की – जो इस लिंग का आरंभ (स्टार्टिंग पॉइंट) या अंत (एंडिंग पॉइंट) पा लेगा वो ही सबसे शक्तिशाली होगा.

भगवान विष्णु नीचे की तरफ गये और ब्रम्‍हा उपर की तरफ. जब बहुत सालों तक भगवान विष्णु को लिंग का अंत नही मिला तो वो वापस आए और उन्होने कहा – “हे महान शक्तिशाली प्रभु इसका कोई अंत नही, मुझे माफ़ करें, ये मेरी अज्ञानता थी की मैं खुद को सबसे शक्तिशाली समझ रहा था.”

ब्रह्मा जी को भी लिंग का आरंभ नही मिला पर उन्होने सोचा मैं जा कर कह देता हू की मुझे आरंभ मिल गया फिर मुझे विष्णु से बड़ा माना जाएगा, ये सोच कर वो वापस आए और घमंड मे बोले – “मैने लिंग का आरंभ खोज लिया”.

तब फिर आकाशवाणी हुई – “ये शिव लिंग है और मेरा कोई आकार नही है, मैं निराकार हू.”

और शिव जी तो सब कुछ जानते ही थे, तो उन्होने भगवान विष्णु को आशीर्वाद दिया और ब्रह्मा को झूठ बोलने के लिए श्राप दिया की – ‘तुम्हारी कभी भी पूजा नही होगी’ तब ब्रह्मा ने अपनी ग़लती के लिए माफी माँगी और फिर भगवान शिव ने उन्हे वरदान दिए.

तबसे भगवान शिव को शिव-लिंग के रूप मे पूजा गया.

तब भगवान ब्रम्‍हा और विष्णु ने उनसे प्रार्थना की – “भगवन् आप हमारे जैसे समान रूप मे हमारे साथ रहें.

तब उस लिंग से भगवान शिव बाहर आए. जिन्हे शिव शंकर (महादेव) कहा गया, जो शिव के ही रूप है, जैसे की विष्णु ओर ब्रम्‍हा.

जीतने भी देवी-देवता, भगवान विष्णु, ब्रम्‍हा ओर शिव-शंकर आँखे (आँखे) बंद करके ध्यान (ध्यान) करते है वो सब भगवान शिव (जिनका कोई रूप नही है, वो जो बस एक बिंदु है) का ही नमन करते है.

 

भगवान शिव का जन्म कैसे हुआ

इस बात का जवाब यही है की, भगवान शिव का ना ही कोई जन्म हुआ ना ही कोई मृत्यु. शिव का ना कोई आदि है ना ही अंत, वो निराकार है, उनका कोई आकार नही है, उनकी कोई उमर नही है. जो चीज़ जन्म लेती है उसे मरना भी होता है . पर भगवान शिव इन सब से परे है, उनका कोई जन्म नही हुआ ना ही उनका कोई अंत होगा. वो सबसे पहले है और सबसे अंत तक रहेंगे. भगवान शिव शंकर (महादेव) जिन्हे हम जानते है, वो उस लिंग से बाहर आए, ये उनका जन्म नही था, ये बस एक आकार ग्रहण करना था.

अलग अलग लोगों की मान्यता अलग अलग है, कोई कुछ कहता है तो कोई कुछ और पर सबसे बड़ा सच ये है की – भगवान शिव हमेशा से है और हमेशा रहेंगे.

जय शंभू.. ✌